सनातन
Panchmukhi Hanuman Vrat: शत्रु, तांत्रिक बाधा और कालसर्प दोष से मुक्ति का उपाय, करें पंचमुखी हनुमान व्रत
संकटमोचन हनुमान: अदृश्य शक्तियों से रक्षा का स्रोत
Panchmukhi Hanuman Vrat: हनुमान जी को यूँ तो संकटमोचन कहा जाता है, लेकिन जब जीवन में विशेष प्रकार की बाधाएँ—जैसे शत्रु संकट, तांत्रिक प्रभाव, या कालसर्प दोष—गहराने लगती हैं, तब पंचमुखी हनुमान व्रत अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है। यह व्रत साधारण मंगलवार के उपवास से अलग होता है और विशेष पूजा-विधि के साथ किया जाता है। [caption id="attachment_86773" align="alignnone" width="369"]पंचमुखी हनुमान के पांच मुखों की दिव्य शक्तियाँ
पंचमुखी हनुमान जी के पांच मुख—हर एक दिशा और शक्ति का प्रतीक होते हैं:
- वानर मुख (पूर्व दिशा): शत्रु विनाश और वीरता प्रदान करता है।
- नरसिंह मुख (दक्षिण दिशा): तांत्रिक और गुप्त बाधाओं का नाश करता है।
- गरुड़ मुख (पश्चिम दिशा): कालसर्प दोष और विष से रक्षा करता है।
- वराह मुख (उत्तर दिशा): जमीन-जायदाद संबंधी झगड़ों से मुक्ति देता है।
- हयग्रीव मुख (ऊर्ध्व दिशा): ध्यान, विद्या और मानसिक शांति को बढ़ाता है।
व्रत कब और कैसे करें?
इस विशेष व्रत की शुरुआत मंगलवार या शनिवार से की जाती है। व्रत की अवधि 11, 21 या 31 मंगलवार तक रखी जाती है। व्रत के दिन निम्न अनुष्ठान किए जाते हैं:- पंचमुखी हनुमान जी की विधिपूर्वक पूजा
- पंचमुखी हनुमान कवच का पाठ
- हनुमान चालीसा और बजरंग बाण का जाप
- भोग: चूरमा लड्डू, गुड़, केले व्रती दिन में एक बार फलाहार करते हैं और ब्रह्मचर्य का पालन करते हैं।