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पुरी रथ यात्रा: 625 श्रद्धालु बीमार, रथ 750 मीटर भी नहीं बढ़े, 10 लाख की भीड़ से अव्यवस्था

पुरी में भगवान जगन्नाथ की रथ में भीड़ ने बिगाड़ा संतुलन 

ओडिशा के पुरी में हर साल भव्यता से निकलने वाली जगन्नाथ रथ यात्रा इस बार भी लाखों भक्तों की भीड़ के साथ शुरू हुई, लेकिन इस बार यात्रा की शुरुआत हेल्थ इमरजेंसी और अव्यवस्था के बीच हुई। शुक्रवार को यात्रा का पहला दिन था और मंदिर प्रशासन के अनुसार करीब 10 लाख श्रद्धालु रथ खींचने पुरी पहुंचे। आमतौर पर पहुंचने वाली भीड़ के मुकाबले यह डेढ़ गुना ज्यादा है।

सिर्फ 750 मीटर चला रथ, 625 लोग बीमार

पहले दिन केवल बलभद्र का रथ 750 मीटर ही बढ़ पाया। सुभद्रा का रथ मुश्किल से आधा किलोमीटर चल सका, जबकि भगवान जगन्नाथ का नंदीघोष रथ केवल एक मीटर ही खिसक पाया। शाम होते-होते स्थिति बिगड़ गई। मरीचकोट चौराहे पर सुभद्रा के रथ के आसपास भीड़ बहुत ज्यादा हो गई। धक्का-मुक्की के बीच 625 श्रद्धालुओं की तबीयत बिगड़ गई। कई बेहोश हुए और कुछ घायल भी हो गए। 70 लोगों को अस्पताल में भर्ती किया गया, जिनमें से 9 की हालत नाजुक बताई जा रही है। घटनास्थल पर तत्काल एंबुलेंस और मेडिकल टीमें बुलाई गईं।

प्रशासन का बयान: रथ मोड़ पर फंसा, सूरज ढलते ही यात्रा रोकी

ओडिशा के कानून मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन ने जानकारी दी कि भगवान बलभद्र का रथ रास्ते में एक मोड़ पर फंस गया था, जिससे आगे की यात्रा धीमी हो गई। शाम 8 बजे सूर्यास्त के बाद तीनों रथों को जहां थे वहीं रोक दिया गया रथों पर ही तीनों विग्रहों की रात्रि और सुबह की पूजा की गई।

आज रथ यात्रा का दूसरा दिन: फिर से शुरू हुई रथ खींचने की परंपरा

शनिवार सुबह 10 बजे से रथ यात्रा दोबारा शुरू हो गई। भक्त बलभद्र का तालध्वज, सुभद्रा का दर्पदलन और जगन्नाथ का नंदीघोष रथ खींच रहे हैं। यात्रा गुंडिचा मंदिर (2.6 किमी दूर) तक जाएगी, जहां तीनों भगवान 9 दिन तक ठहरेंगे

विदेशों से भी पहुंचे श्रद्धालु: वेस्ट अफ्रीका से भक्त बोले पहली बार दर्शन का सौभाग्य

इस बार यात्रा में विदेशों से भी भक्तों की भारी उपस्थिति देखने को मिली। वेस्ट अफ्रीका से आए एक श्रद्धालु ने कहा, “यह मेरी पहली रथ यात्रा है। कल हम भगवान के केवल दर्शन कर पाए, आज उम्मीद है कि रथ खींचने का सौभाग्य भी मिलेगा।”

पुरी महाराज ने निभाई परंपरा: 'छेरा पहोरा' की रस्म निभाई

यात्रा की शुरुआत से पहले पुरी के महाराज गजपति दिव्य सिंह देव ने परंपरागत 'छेरा पहोरा' की रस्म निभाई। उन्होंने तीनों रथों के आगे सोने के झाड़ू से बुहारा लगाया। यह दर्शाता है कि भगवान और भक्त के बीच कोई भेद नहीं।

सुरक्षा व्यवस्था से निपटना बना चुनौती

10 लाख श्रद्धालुओं की भीड़ के चलते पुलिस और सुरक्षा बलों को व्यवस्था संभालने में भारी मशक्कत करनी पड़ी।
  • कई जगह धक्का-मुक्की देखी गई।
  • एक महिला की तबीयत बिगड़ने पर भक्तों ने उसे कंधे पर उठा कर मेडिकल टेंट पहुंचाया
  • पुलिस को भीड़ नियंत्रित करने के लिए बैरिकेडिंग करनी पड़ी।
जगन्नाथ रथ यात्रा 2025 श्रद्धा और आस्था का पर्व है, लेकिन इस बार भीड़ और प्रशासनिक तैयारियों की कमी के कारण पहले दिन ही संकट में पड़ गई। भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए यात्रियों की संख्या नियंत्रित करने, भीड़ प्रबंधन और मेडिकल इन्फ्रास्ट्रक्चर को और बेहतर बनाने की जरूरत है। आज यात्रा फिर शुरू हो चुकी है और उम्मीद है कि भगवान सुरक्षित रूप से गुंडिचा मंदिर तक पहुंचेंगे।