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Diwali 2025: मिट्टी के दीए जलाने का महत्व और डिजाइनर दीयों का सच?

Diwali 2025: दीपावली, सनातन धर्म का सबसे बड़ा त्योहार, इस साल 20 अक्टूबर को मनाया जाएगा। यह पर्व रोशनी का प्रतीक माना जाता है और लोग इस दिन दीपक जलाकर घर और वातावरण में उजाला फैलाते हैं। परंपरागत रूप से मिट्टी के दीयों को जलाना शुभ माना गया है, लेकिन आजकल बाजार में डिजाइनर मिट्टी के दीयों की भरमार है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या इन्हें घर में जलाना शुभ या अशुभ है। Read More: Dhanteras Date 2025: 18 अक्टूबर को मनाया जाएगा धनतेरस, जानिए क्या करें और क्या न करें…

मिट्टी का दीया क्यों है शुभ?

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, मिट्टी का दीपक पंच तत्वों का प्रतीक होता है। पारंपरिक मिट्टी के दीयों को जलाना: 1. पर्यावरण के अनुकूल है। 2. आध्यात्मिक रूप से शुभ माना जाता है। 3. स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी है। ज्योतिषाचार्य राकेश चतुर्वेदी के अनुसार, जब मिट्टी के दीए में सरसों का तेल जलाया जाता है तो अंधकार समाप्त होता है और घर में सकारात्मकता आती है। मिट्टी का दीया प्रकाश का प्रतीक है, जो अज्ञानता मिटाकर ज्ञान और उजाला लाता है। इसके अलावा, दीपक में देवी-देवताओं का तेज होता है, इसलिए पूजा में इसे जलाना शुभ माना जाता है।

क्या डिजाइनर मिट्टी के दीये अशुभ हैं?

ज्योतिषाचार्य के मुताबिक, धार्मिक ग्रंथों में सिर्फ मिट्टी से बने पारंपरिक दीए ही शुभ माने गए हैं। 1. जिन डिजाइनर दीयों में केमिकल युक्त सामग्री हो, उन्हें जलाना पूजा के लिए शुभ नहीं माना जाता। 2. ये दीये पर्यावरण के अनुकूल भी नहीं होते। हालांकि, यदि डिजाइनर दीए में सरसों का तेल इस्तेमाल किया जा सके, तो उन्हें जलाया जा सकता है।

डिजाइनर दीयों को जलाने से क्यों बचें?

1. कुछ डिजाइनर दीए चिकनी सामग्री से बने होते हैं, जिन्हें साफ करना मुश्किल होता है और ये दीपक जलाने के लिए आदर्श नहीं माने जाते। 2. कुछ में प्लास्टिक या अन्य सिंथेटिक सामग्री भी होती है, जो पर्यावरण और स्वास्थ्य दोनों के लिए हानिकारक हो सकती है।