उज्जैन की वैदिक घड़ी अब दुनिया में दिखाएगी भारतीय कालगणना, मिला पहला ऑर्डर
उज्जैन की पहचान अब सिर्फ महाकाल और ज्योतिर्लिंग तक सीमित नहीं रहने वाली। शहर में विकसित विक्रमादित्य वैदिक घड़ी की तकनीक अब वैश्विक स्तर पर पहुंचने जा रही है। इसी तकनीक पर आधारित ‘आरोहणम् वैदिक घड़ी’ का पहला व्यावसायिक संस्करण जारी किया गया है।यह घड़ी सामान्य डिजिटल घड़ी की तरह केवल समय नहीं बताएगी, बल्कि तिथि, नक्षत्र, योग, करण, वार, मुहूर्त और पंचांग की जानकारी भी रियल टाइम में देगी। इसका पहला ऑर्डर लखनऊ के लेटे हनुमान मंदिर से मिला है।
सिर्फ समय नहीं, बताएगी तिथि और मुहूर्त
करीब 6 फीट ऊंची डिजिटल इंस्टालेशन को इस तरह डिजाइन किया गया है कि जिस स्थान पर इसे लगाया जाएगा, वहां के अक्षांश-देशांतर और खगोलीय गणनाओं के आधार पर यह स्थानीय सूर्योदय के अनुसार वैदिक समय प्रदर्शित करेगी।
इसमें रियल टाइम में ये जानकारियां दिखाई जाएंगी
- तिथि
- नक्षत्र
- योग
- करण
- वार
- मुहूर्त
- पंचांग
- पर्व और त्योहार
- सूर्योदय और सूर्यास्त
यानी यह घड़ी आधुनिक डिजिटल तकनीक और भारतीय वैदिक कालगणना को एक साथ जोड़ने की कोशिश है।
लखनऊ के लेटे हनुमान मंदिर से मिला पहला ऑर्डर
‘आरोहणम् वैदिक घड़ी’ के शुरुआती चरण में 108 फाउंडर एडिशन तैयार किए जाएंगे। हर इंस्टालेशन को यूनिक सीरियल नंबर के साथ प्रमाणपत्र दिया जाएगा।इसकी शुरुआती कीमत ₹2.49 लाख रखी गई है। पहला ऑर्डर लखनऊ के गोमती तट स्थित लेटे हनुमान मंदिर से मिल चुका है। यहां इसे जल्द स्थापित किया जाएगा।
एयरपोर्ट से होटल तक लगाई जाएगी
इस वैदिक घड़ी को भारत के साथ-साथ विदेशों में भी स्थापित करने की योजना है। इसे खास तौर पर-एयरपोर्ट, होटल, मंदिर, संग्रहालय, कॉर्पोरेट मुख्यालय, सांस्कृतिक संस्थानों, के लिए विकसित किया गया है, इसका उद्देश्य भारतीय कालगणना और वैदिक समय प्रणाली को आधुनिक डिजिटल माध्यम से दुनिया के सामने पेश करना है,
2024 में पीएम मोदी ने किया था लोकार्पण
इस तकनीक की शुरुआत 29 फरवरी 2024 को हुई थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उज्जैन में विक्रमादित्य वैदिक घड़ी का लोकार्पण किया था।इसके बाद इसी तकनीक पर आधारित मोबाइल ऐप भी विकसित किया गया। इसमें भारतीय कालगणना, पंचांग, शुभ-अशुभ मुहूर्त, व्रत-त्योहार, सूर्योदय-सूर्यास्त और मौसम समेत कई जानकारियां उपलब्ध कराई गईं।