अष्टमी पर ऐसे करें मां बगलामुखी की पूजा, शत्रुओं पर मिलेगी विजय! जानें विधि
माघ मास की पूजा गुप्त तरीके से की जाती है. मान्यता है कि इससे भक्त के सभी कष्ट समाप्त हो जाते हैं और माता दुर्गा की विशेष कृपा मिलती है. आइए जानते हैं नवरात्री के आठवें दिन कोनसी देवी माँ की पूजा की जाती हैं
मां बगलामुखी का महत्व
गुप्त नवरात्री के आठवें दिन मां बगलामुखी की पूजा करने का नियम है. मां बगलामुखी को पीताम्बरा और ब्रह्मास्त्र भी कहा जाता है. मां बगलामुखी के मुख से पीली आभा निकलती रहती है. इनकी पूजा में पीले रंग का विशेष महत्व है. मां बगलामुखी को स्तम्भन शक्ति की देवी माना जाता है. शास्त्रों में बताया गया कि सौराष्ट्र में आए महातूफ़ान को शांत करने के लिए भगवान विष्णु ने मां बगलामुखी की तपस्या की थी. भगवान विष्णु के द्वारा की गई तपस्या के फलस्वरूप मां बगलामुखी का प्राकट्य हुआ था. विशेष रूप से शत्रु और विरोधियों को परास्त करने तथा मुकदमे में जीत हासिल करने के लिए मां बगलामुखी की उपासना अचूक मानी जाती है. मां को पीले रंग का भोग लगाना चाहिए.
आठवें दिन की पूजा विधि
मां बगलामुखी की साधना करने के लिए उत्तर दिशा की तरफ मुंह करके पीले वस्त्र धारण कर खड़े हो जाएं. अब मां को पीले रंग के फूल अर्पित करें. पूरी विधि से उनकी पूजा करें. इसके बाद मां को पीले रंग का प्रसाद चढ़ाएं. चाहें तो बेसन के लड्डू का भी भोग लगा सकते हैं. इस दिन मां की पूजा करने से जीवन से सभी प्रकार के संकट दूर होते हैं और जीवन सकारात्मकता से भर जाता है.
इन मंत्रों का जाप करें
मां बगलामुखी का शत्रु नाशक मंत्र: ॐ बगलामुखी देव्यै ह्लीं ह्रीं क्लीं शत्रु नाशं कुरु मां बगलामुखी का तंत्र-मंत्र नाशक मंत्र: ॐ ह्लीं श्रीं ह्लीं पीताम्बरे तंत्र बाधां नाशय नाशय मां बगलामुखी का भय नाशक मंत्र: ॐ ह्लीं ह्लीं ह्लीं बगले सर्व भयं हर