गृह मंत्री अमित शाह ने X पर पोस्ट करके कहा की ” कोई फर्क नहीं पड़ता कि एक शक्तिशाली पारिस्थितिकी तंत्र कितना प्रयास करता है, वह सत्य को हमेशा के लिए अंधेरे में नहीं छिपा सकता। यही संदेश देती है फिल्म साबरमती रिपोर्ट (Sabarmati Report), जो न केवल साहसिकता का प्रतीक है, बल्कि उस अंधेरे सच को उजागर करने का प्रयास करती है जिसे अब तक छुपाने की कोशिश की गई थी। यह फिल्म अपनी बेबाक़ता और निर्भीकता से एक ऐसे खतरनाक सत्य को सामने लाती है जिसे अनगिनत वर्षों तक दबाकर रखा गया था”
फिल्म साबरमती रिपोर्ट का मुख्य उद्देश्य 2002 के साबरमती एक्सप्रेस ट्रेन जलाने की घटना से जुड़ी सच्चाई को उजागर करना है। यह घटना न केवल भारतीय इतिहास के एक संवेदनशील और दर्दनाक अध्याय के रूप में उभरकर सामने आई, बल्कि इसके राजनीतिक, सामाजिक और धार्मिक असर ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था।

फिल्म की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह न सिर्फ अपनी कहानी को सामने लाती है, बल्कि वह शक्तिशाली पारिस्थिति की तंत्र, जो इस सच्चाई को दबाने का कार्य कर रहा था, उसे भी चुनौती देती है। साबरमती रिपोर्ट ने अपने माध्यम से उस बेज़बान सत्य को सामने रखा है जिसे कभी भी सुनने या देखने का मौका नहीं मिला।
