एक ही दिन में दो ऐतिहासिक मोड़ – एक 2019 में और एक 2025 में!
कुछ तारीखें इतिहास में दर्ज होती हैं और फिर वो दोहराई भी जाती हैं। 5 अगस्त भारत के लिए एक ऐसी ही तारीख बन चुकी है। साल 2019, जब संसद में गूंजती आवाज़ में अमित शाह ने अनुच्छेद 370 को हटाने की घोषणा की थी। और आज, 5 अगस्त 2025, जब वो भारत के सबसे लंबे समय तक गृह मंत्री बने तो लगा जैसे इतिहास खुद को दोहराता है।
एक अनोखा संयोग: आर्टिकल 370 और अमित शाह का रिकॉर्ड
5 अगस्त 2019 को पूरा देश टीवी पर टकटकी लगाए बैठा था। गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में जो किया, वह दशकों से केवल एक राजनीतिक वादा था अनुच्छेद 370 का अंत। लोगों ने उस दिन एक नई राजनीति देखी जहाँ नारे नहीं, निर्णय लिए गए।
और ठीक 6 साल बाद, उसी तारीख को अमित शाह ने 2,258 दिन पूरे कर लालकृष्ण आडवाणी का रिकॉर्ड तोड़ दिया जो 1998 से 2004 तक 2,256 दिन तक गृह मंत्री रहे थे। क्या ये महज संयोग है? शायद नहीं। राजनीति में प्रतीकों का भी अपना अर्थ होता है।
अमित शाह: “चाणक्य” से “सिस्टम” तक
अमित शाह को राजनीति में अक्सर एक ‘संगठनकर्ता’ या ‘रणनीतिकार’ के तौर पर देखा गया
लेकिन गृह मंत्री के रूप में उन्होंने नीतिगत फैसलों और व्यवस्थागत बदलावों के ज़रिए खुद को सिर्फ नेता नहीं, बल्कि सिस्टम का आर्किटेक्ट साबित किया।
- CAA (नागरिकता संशोधन कानून)
- एनआरसी पर बहस
- कश्मीर का पुनर्गठन
- आंतरिक सुरक्षा में बदलाव
- और सहकारिता मंत्रालय की नींव ये सब उनकी कार्यशैली की झलक देते हैं।
शाह एक ऐसे नेता हैं जिनकी बात कम और नीति ज़्यादा बोलती है।
मोदी-शाह युग: आंकड़ों से आगे की कहानी
प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री शाह की जोड़ी को राजनीति का सबसे प्रभावशाली गठजोड़ कहा जाता है। अब मोदी जी भी इतिहास रच चुके हैं इंदिरा गांधी का रिकॉर्ड पीछे छोड़ते हुए 4078 दिन लगातार प्रधानमंत्री रह चुके हैं। नेहरू जी के रिकॉर्ड (6126 दिन) से सिर्फ 2048 दिन पीछे।
3 बार लोकसभा चुनाव जीतकर लगातार प्रधानमंत्री बनने वाले, नेहरू के बाद पहले नेता। और अब 24 साल से अधिक समय तक चुने हुए प्रमुख के रूप में शासन का नेतृत्व। ये आंकड़े सिर्फ संख्याएँ नहीं हैं ये उस राजनीतिक सोच का प्रमाण हैं जो सिर्फ कुर्सी नहीं, विजन से चलती है।
राजनीति का मानवीय चेहरा
किसी भी लोकतंत्र में यह जानना ज़रूरी है कि सत्ता में आने वाले नेता कितने समय तक नहीं, बल्कि कैसे शासन करते हैं।
अमित शाह के मामले में:
- उन्होंने खुद को ‘राजनीतिक मैनेजर’ से ‘राष्ट्रीय नीति निर्माता’ तक विकसित किया।
- अपने संघर्षों और विचारधारात्मक दृढ़ता के चलते, वो विरोधियों के लिए भी एक चुनौती बने।
राजनीति में “रिकॉर्ड” तो हर दशक में बनते हैं। पर अगर कोई तारीख खुद बोलने लगे, तो समझिए वहां इतिहास लिखा जा रहा है।
समय के साथ चलने वाले नहीं, समय को चलाने वाले नेता
5 अगस्त अब सिर्फ एक तारीख नहीं ये दो ऐतिहासिक मोड़ों की समकालीन कहानी है। 2019 में जब शाह ने अनुच्छेद 370 हटाया, तो लोगों ने एक साहसी निर्णय देखा। 2025 में जब उन्होंने सबसे लंबे समय तक गृह मंत्री रहने का कीर्तिमान बनाया, तो लोगों ने एक स्थायी नेतृत्व की ताकत को पहचाना। और यही बात उन्हें सिर्फ राजनेता नहीं, युग निर्माता बनाती है।
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