Amit Shah Bastar Visit 2025 : केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का आगामी छत्तीसगढ़ दौरा राजनीतिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अहम माना जा रहा है। इस दौरे में वह न केवल राज्य की सुरक्षा और विकास योजनाओं का जायजा लेंगे बल्कि बस्तर की गहरी आदिवासी परंपराओं से भी रूबरू होंगे। इसके साथ ही वह स्वदेशी मेले में भी शामिल होकर हस्तशिल्प, कला और संस्कृति का संदेश राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाएंगे।
बस्तर की आदिवासी परंपराए
अमित शाह का यह कार्यक्रम केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक जुड़ाव का प्रतीक माना जा रहा है।
बस्तर क्षेत्र आदिवासी संस्कृति, कला और लोक रीति-रिवाजों के लिए प्रसिद्ध है।
शाह यहां की पारंपरिक जनजातीय संस्थाओं,कार्यक्रमों के बारे में जानकारी लेंगे।
जनजातियों से संवाद करके वह उनकी समस्याओं और अपेक्षाओं को भी समझने की कोशिश करेंगे।
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स्वदेशी मेले में शामिल होंगे शाह
छत्तीसगढ़ के स्वदेशी मेले का आयोजन हर साल स्थानीय शिल्प और परंपराओं को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया जाता है।
अमित शाह मेला स्थल पर जाकर हस्तशिल्प और हथकरघा उत्पादों का अवलोकन करेंगे।
मेला जनजातीय कारीगरों और उद्यमियों को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मंच देने का काम करता है।
शाह का मेले में शामिल होना स्वदेशी को मजबूत करने और आत्मनिर्भर भारत की भावना को आगे बढ़ाने का संकेत है।
राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण दौरा
छत्तीसगढ़ में आगामी चुनाव और राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए अमित शाह का यह दौरा खास महत्व रखता है।
भाजपा राज्य में अपनी पकड़ मजबूत करने और जनसमर्थन जुटाने की कोशिश कर रही है।
आदिवासी क्षेत्र छत्तीसगढ़ की राजनीति में अहम भूमिका निभाता है।
केंद्र सरकार आदिवासी समाज के विकास और सम्मान के लिए गंभीर है।
सुरक्षा और विकास पर फोकस
बस्तर क्षेत्र लंबे समय से नक्सली गतिविधियों से प्रभावित रहा है। ऐसे में शाह का दौरा सुरक्षा रणनीतियों पर भी केंद्रित होगा।
प्रशासन और सुरक्षा बलों से नक्सल प्रभावित इलाकों की स्थिति पर चर्चा करेंगे।
विकास परियोजनाओं की प्रगति और आदिवासी युवाओं के लिए रोजगार सृजन की योजनाओं का भी मूल्यांकन करेंगे।
जनजातीय समाज के लिए संदेश
अमित शाह के इस कार्यक्रम से यह स्पष्ट है कि केंद्र सरकार जनजातीय समाज की संस्कृति और परंपराओं का सम्मान करती है।
आदिवासी केवल वोट बैंक नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक धरोहर के महत्वपूर्ण हिस्सेदार हैं।
शाह का यह जुड़ाव जनजातियों के भीतर विश्वास और आत्मसम्मान को और मजबूत कर सकता है।
