Amit Shah Bastar Visit : केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का बस्तर दौरा इस बार न केवल सुरक्षा और राजनीति के लिहाज से बल्कि स्थानीय संस्कृति के उत्सव मुरिया दरबार के कारण भी बेहद खास है। बस्तर दशहरा के दौरान उनकी उपस्थिति और मां दंतेश्वरी की पूजा मुरिया दरबार में सहभाग ने इस आयोजन को राष्ट्रीय सुर्खियों में ला दिया है।
नारियल के पत्तों से सजा मुरिया दरबार
बस्तर की ऐतिहासिक मुरिया दरबार परंपरा की झलक भव्य रही। दरबार स्थल को पारंपरिक अंदाज में नारियल के पत्तों, फूलों, रंग-बिरंगी सजावट से बड़े मनोयोग से सजाया गया। आदिवासी संस्कृति का आधार मुरिया दरबार बस्तर दशहरा की आत्मा मानी जाती है।
मां दंतेश्वरी की पूजा
मंदिर बस्तर की कुल देवी दंतेश्वरी को समर्पित है और यहां की धार्मिक व सांस्कृतिक चेतना का मूल केंद्र है। काफी संख्या में लोग दर्शन करने आते है
क्या है मुरिया दरबार?
मुरिया दरबार बस्तर की अनूठी लोक परंपरा है, जिसमें दशहरा उत्सव के दौरान 80 परगनों के सैकड़ों मांझी-मुखिया, पुजारी, आदिवासी समुदाय के प्रतिनिधि एक जगह एकत्र होते हैं। पारंपरिक राजा या आधुनिक प्रशासन क्षेत्रीय समस्याओं, जन-सुनवाई, सामाजिक मुद्दों और परंपरागत फैसलों का समाधान इसी दरबार में करते हैं। यह लोकतंत्र की जड़ों के संरक्षण का आदिवासी तरीका है, जिसकी परंपरा लगभग 600 वर्ष पुरानी मानी जाती है।
मुरिया दरबार समाज और प्रशासन के संवाद का सेतु है, जहां आदिवासी समाज की समस्याएं, विकास कार्यों की जानकारी तथा सांस्कृतिक एकता का उत्सव मनाया जाता है। पहले जमाने में राजा स्वयं दरबार लगाते थे, अब जिला प्रशासन व राज्य-सरकार यहां जन-सुनवाई का मंच बनाते हैं।
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सांस्कृतिक और राजनीतिक महत्व
यह दौरा केंद्र सरकार की बस्तर क्षेत्र में विकसित होती शांति व समरसता की नीति को और मजबूती देता है।मुरिया दरबार का यह आयोजन सांस्कृतिक संरक्षण, सामाजिक संवाद व प्रशासनिक पारदर्शिता की मिसाल है, जो देश के लोकतंत्र और विविधता को मजबूती प्रदान करता है।
