US Mining in Balochistan Pakistan’s Deal with America : पाकिस्तान ने माइनिंग के लिए दिया लीज,विद्रोहियों से निपटना है मकसद
US Mining in Balochistan Pakistan’s Deal with America : पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में बढ़ते विद्रोह और संघर्षों के बीच, पाकिस्तान आर्मी चीफ आसिम मुनीर ने अमेरिका को खनिज माइनिंग लीज देने का निर्णय लिया है। इसके तहत, अमेरिका बलूचिस्तान में स्थित रेको डिक जैसी दुनिया की सबसे बड़ी तांबा और सोने की खदानों में माइनिंग करेगा।
पाकिस्तानी सेना और शहबाज सरकार का मानना है कि इस खनिज संसाधन निवेश से न केवल बलूच विद्रोहियों के हमले कम होंगे, बल्कि अमेरिका अपनी निवेश सुरक्षा के लिए अपनी सेना और ड्रोन का इस्तेमाल करेगा। एक सैन्य सूत्र ने इस बारे में जानकारी दी कि इस तरह की अमेरिकी उपस्थिति बलूच विद्रोहियों को काबू करने में मदद करेगी।
अमेरिका का माइनिंग निवेश और सुरक्षा की गारंटी
सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान की शहबाज सरकार और सेना का यह मानना है कि अमेरिका का माइनिंग निवेश बलूच विद्रोहियों से निपटने के लिए एक प्रभावी उपाय हो सकता है। इसका उद्देश्य अमेरिका की सैन्य ताकत का उपयोग करके खनिज खनन को सुरक्षित करना है।
सेंट्रल एशिया मामलों के वरिष्ठ अधिकारी एरिक मेयर की अगुवाई में अमेरिकी अधिकारियों का एक प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद में पाक सेना और सरकार के अधिकारियों से मुलाकात कर चुका है, और इस डील के लिए सहमति बनाई जा चुकी है।
चीन से बढ़ती निर्भरता और पाकिस्तान की कोशिशें
पाकिस्तान ने पिछले पांच वर्षों में चीन पर अपनी निर्भरता बढ़ाई है। 2019 से 2023 के बीच, पाकिस्तान का 81% हथियार चीन से आया है। इसके अलावा, पाकिस्तान ने चीन से भारी लोन भी लिया है। लेकिन इस बढ़ती चीन पर निर्भरता के कारण, पाकिस्तान-अमेरिका रिश्तों में दरार आई है।
अब पाकिस्तान सेना की कोशिश है कि इस खनिज निवेश के माध्यम से अमेरिका के साथ रिश्ते सुधारे जाएं और चीन के प्रभाव को कम किया जा सके।
बैटरी मिनरल्स की बढ़ती मांग
बैटरी मिनरल्स जैसे लिथियम, कोबाल्ट, और तांबा की मांग 2040 तक चौगुनी होने का अनुमान है। इन खनिजों का उपयोग इलेक्ट्रिक वाहनों और बैटरी टेक्नोलॉजी में बढ़ता जा रहा है। अमेरिकी सेना इन खनिजों की सबसे बड़ी खरीदार बनकर उभर रही है। उनके ड्रोन और ऊर्जा-आधारित हथियारों का संचालन पूरी तरह से बैटरी पर निर्भर है।
विश्लेषकों के अनुसार, 2027 तक, अमेरिकी सेना अपनी गैर-लड़ाकू वाहनों को बैटरी से चलने वाले वाहनों में बदलने की योजना बना रही है। ऐसे में, बलूचिस्तान में स्थित खनिजों की अहमियत और भी बढ़ जाती है।
पाकिस्तान: कॉपर का सऊदी अरब बनने की राह पर
बलूचिस्तान में स्थित रेको डिक खदान दुनिया की सबसे बड़ी अछूती तांबा-सोने की खदानों में से एक है, जिसकी कीमत 100 लाख करोड़ रुपए तक हो सकती है। इसके अतिरिक्त, गिलगित-बाल्टिस्तान में भी तांबा और सोना के खनिज संसाधन हैं। पाकिस्तान की सरकार इस खनिज संपत्ति को चीन को सौंपकर अपनी आर्थिक स्थिति सुधारने की कोशिश कर रही है।
विद्रोहियों के खतरे को कैसे रोका जाएगा?
चीन ने बलूचिस्तान के खनिज संसाधनों से अरबों कमाए हैं, लेकिन स्थानीय समुदाय में इसका लाभ नहीं पहुंचा। विश्लेषक मुहम्मद इलियास के अनुसार, यदि अमेरिका इस क्षेत्र में सही तरीके से निवेश करता है, तो स्थानीय विद्रोही इस पर आपत्ति नहीं करेंगे, क्योंकि वे बदलाव चाहते हैं।
बलूचिस्तान में भौगोलिक स्थिति और खनिज संसाधनों की अहमियत को देखते हुए, पाकिस्तान इस क्षेत्र को “कॉपर का सऊदी अरब” बनने की रेस में शामिल करना चाहता है।
पाकिस्तान का खनिज भंडार
बलूचिस्तान की भौगोलिक स्थिति और इसके खनिज संसाधन इसे पाकिस्तान का सबसे अमीर राज्य बनाते हैं। यहां की रेको डिक खान में अनुमानित 40 करोड़ टन सोना और 174.42 लाख करोड़ रुपए की खनिज संपत्ति है। बावजूद इसके, यह इलाका पाकिस्तान के सबसे पिछड़े इलाकों में से एक है।
पाकिस्तान की सेना अब इस खनिज संपत्ति से लाभ उठाने की योजना बना रही है, ताकि चीन पर निर्भरता कम हो सके और अमेरिका के साथ रिश्ते बेहतर किए जा सकें।
एक महत्वपूर्ण रणनीतिक स्थान
पाकिस्तान अब अमेरिका को बलूचिस्तान में खनिज माइनिंग लीज देने का फैसला कर रहा है। इससे न केवल विद्रोहियों से निपटने में मदद मिलेगी, बल्कि पाकिस्तान को अपनी आर्थिक स्थिति सुधारने का भी एक मौका मिलेगा। हालांकि, यह कदम अमेरिका-पाकिस्तान संबंधों में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकता है, और चीन के बढ़ते प्रभाव को चुनौती दे सकता है।
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