america iran nuclear strike: ट्रम्प का धमकी भरा बयान- ‘ईरान को शांति का रास्ता अपनाना होगा’
america iran nuclear strike: अमेरिका और ईरान के बीच तकरार एक नई और खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुकी है। रविवार की सुबह भारतीय समयानुसार करीब 4:30 बजे, अमेरिकी सेना ने ईरान के तीन प्रमुख परमाणु ठिकानों पर हमला कर दिया। इनमें फोर्डो, नतांज और इस्फहान शामिल हैं।
पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस हमले के कुछ घंटे बाद अमेरिकी जनता को संबोधित करते हुए कहा कि “ईरान की परमाणु साइट्स को पूरी तरह से तबाह कर दिया गया है। फोर्डो पर बमों की पूरी खेप गिरा दी गई है।” उन्होंने ईरान को चेतावनी दी कि अगर वह शांति की दिशा में कदम नहीं बढ़ाता, तो अमेरिका और बड़ा हमला करेगा।
ईरान का जवाब: इजराइल पर मिसाइल हमला
अमेरिका द्वारा किए गए हमले के तुरंत बाद, ईरान ने अपने प्रतिरोध स्वरूप इजराइल के 14 प्रमुख शहरों पर मिसाइलें दाग दीं। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया कि यह “ऑपरेशन ऑनेस्ट प्रॉमिस 3” था, और इसके तहत हाइफा, तेल अवीव सहित कई अहम सैन्य और रिहायशी ठिकानों को निशाना बनाया गया। टाइम्स ऑफ इजराइल के अनुसार, हमले में अब तक 23 लोग घायल हो चुके हैं।
व्हाइट हाउस सिचुएशन रूम से ट्रम्प की नजरें
ईरान पर हमले के समय, राष्ट्रपति ट्रम्प और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस व्हाइट हाउस के सिचुएशन रूम में मौजूद थे। ट्रम्प के साथ व्हाइट हाउस की चीफ ऑफ स्टाफ सूजी विल्स, ज्वाइंट चीफ ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष जनरल डैन केन और अन्य कैबिनेट सदस्य भी उपस्थित थे।
सैन्य संघर्ष और बढ़ते हालात
इजराइल और ईरान के बीच संघर्ष अब दसवें दिन में प्रवेश कर चुका है। ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स के अनुसार, ईरान में 13 जून से अब तक 657 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 2000 से ज्यादा लोग घायल हो चुके हैं। इजराइल में अब तक 24 लोगों की मौत हो चुकी है और 900 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं।
ब्रिटेन का समर्थन और ईरान की आलोचना
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने अमेरिका के हमलों का समर्थन किया, कहते हुए कि ईरान का न्यूक्लियर प्रोग्राम वैश्विक सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन चुका था। वहीं, ईरान ने अमेरिका पर आरोप लगाते हुए कहा कि वह कूटनीतिक प्रयासों को नजरअंदाज करके युद्ध की दिशा में बढ़ रहा है।

विदेश मंत्रालय ने इस हमले को “अंतरराष्ट्रीय कानून का गंभीर उल्लंघन” और “अमेरिका द्वारा खतरनाक युद्ध की शुरुआत” बताया।
ईरान के जवाबी हमले का विवरण
ईरान ने “ऑपरेशन ऑनेस्ट प्रॉमिस 3” के तहत इजराइल की राजधानी तेल अवीव सहित कई सैन्य और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया। ईरानी सेना के मुताबिक, इस हमले में लंबी दूरी की मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया, जिनमें शक्तिशाली विस्फोटक लगे थे। हवाई अड्डों, बायोलॉजिकल रिसर्च सेंटर, और हथियारों के केंद्रों पर यह हमले किए गए थे।
अमेरिका ने हमले से पहले दी थी चेतावनी
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने ईरान को हमले से एक दिन पहले ही जानकारी दे दी थी। मीडिल ईस्ट-बेस्ड न्यूज वेबसाइट अमवाज मीडिया के अनुसार, ट्रम्प प्रशासन ने 21 जून को ईरान को सूचित किया था कि उनका उद्देश्य केवल फोर्डो, नतांज और इस्फहान परमाणु सुविधाओं पर हमला करना है, न कि युद्ध की स्थिति उत्पन्न करना।
अमेरिका द्वारा किए गए इस बमबारी ने वैश्विक राजनीति में एक नई और खतरनाक घड़ी पैदा कर दी है। ईरान का जवाबी हमला और दोनों देशों के बीच बढ़ता तनाव पूरी दुनिया के लिए चिंता का कारण बन चुका है। ब्रिटेन और अन्य देशों ने अमेरिका के कदम का समर्थन किया है, जबकि ईरान इसे एक गैरकानूनी और आक्रामक कदम मान रहा है। इस संघर्ष के परिणामस्वरूप दोनों देशों में सैकड़ों लोग प्रभावित हुए हैं, और इसकी गूंज पूरी दुनिया में सुनाई दे रही है।
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