क्या वाकई अमेरिका का निशाना सिर्फ BLA है?
कभी-कभी खबरें सिर्फ शब्दों से नहीं बनतीं वो बनती हैं उन चुप सवालों से, जो शब्दों के बीच छिपे होते हैं। पाकिस्तान के आर्मी चीफ जनरल आसिम मुनीर अभी अमेरिका में हैं और इसी दौरान अमेरिका ने बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) को विदेशी आतंकी संगठन (FTO) घोषित कर दिया। क्या यह सिर्फ संयोग है? शायद नहीं।
BLA कौन है और क्यों है अमेरिका के निशाने पर?
BLA (Baloch Liberation Army) कोई नया नाम नहीं है। पिछले दो दशकों से यह संगठन बलूचिस्तान की आज़ादी की मांग कर रहा है। और ये सिर्फ नारेबाज़ी नहीं इनके पीछे बम, बंदूक और खून की कहानियाँ हैं।
- 2024 कराची एयरपोर्ट के पास और ग्वादर पोर्ट पर आत्मघाती हमले
- 2025 जाफर एक्सप्रेस ट्रेन हाईजैक, 31 की मौत, 300 से ज़्यादा बंधक
इन्हीं घटनाओं के बाद अमेरिका ने कहा “Enough is enough.” अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो का बयान साफ था ये कदम ट्रंप प्रशासन की आतंकवाद के खिलाफ कठोर नीति का हिस्सा है।
क्यों खास है ये फैसला मुनीर की यात्रा के दौरान?
ये वही जनरल मुनीर हैं जिनकी डेढ़ महीने में यह दूसरी अमेरिका यात्रा है। पाकिस्तान इस वक्त राजनीतिक अस्थिरता, आर्थिक संकट और आंतरिक विद्रोहों से जूझ रहा है। बलूचिस्तान उनमें सबसे पुराना और सबसे पेचीदा मुद्दा है।
तो जब अमेरिका, ठीक उस समय BLA को आतंकी घोषित करता है जब मुनीर वहां हैं तो यह महज एक ‘टाइमिंग’ नहीं, बल्कि एक राजनीतिक संकेत है। हम आपकी लड़ाई को पहचानते हैं लेकिन अब इसे हमारी सुरक्षा नीति से भी जोड़ रहे हैं।
FTO लिस्ट में नाम आने का मतलब क्या होता है?
इस लिस्ट में आना एक संगठन के लिए सबसे बड़ी वैश्विक सज़ा जैसा है अमेरिका के लिए सीधा खतरा माना जाता है। किसी भी व्यक्ति या संस्था द्वारा फंडिंग देना अब अपराध है। संगठन से जुड़े किसी भी व्यक्ति की संपत्ति फ्रीज़ की जा सकती है। कोई भी समर्थन चाहे विचारधारा से ही क्यों न हो कानूनी कार्रवाई में गिना जाएगा।
बलूचिस्तान का दर्द आतंकवाद या अलगाववाद?
BLA सिर्फ आतंक नहीं फैलाता वो खुद को एक स्वतंत्रता सेनानी संगठन मानता है। उनकी दलील है
पाकिस्तान हमारी ज़मीन के प्राकृतिक संसाधनों को लूट रहा है, जबकि बलूच जनता ग़रीबी और बुनियादी हकों के लिए तरस रही है।
उनका गुस्सा CPEC (चीन-पाकिस्तान इकनॉमिक कॉरिडोर) पर भी है। चीन की मौजूदगी, संसाधनों की खुदाई, और लोकल लोगों को नज़रअंदाज़ किया जाना यह सब BLA की ‘गोरिल्ला’ रणनीति को मजबूत करता है। छिपकर हमला करना, सेना पर फुर्ती से प्रहार करना, और फिर गायब हो जाना यही उनका तरीका है।
अब क्या होगा?
पाकिस्तान को अमेरिका की तरफ से कूटनीतिक समर्थन तो मिल गया, लेकिन क्या इससे जमीन पर कुछ बदलेगा? क्या यह BLA को कमजोर करेगा या और ज़िद्दी बनाएगा? क्या बलूचिस्तान में शांति का कोई रास्ता सिर्फ ताकत से निकलेगा?
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