आतंक का डर नहीं श्रद्धालु बोले ‘बाबा साथ हैं’!
तीर्थ और ताकत का संगम एक बार फिर शुरू होने जा रहा है। 3 जुलाई से शुरू हो रही अमरनाथ यात्रा 2025 के लिए देशभर के श्रद्धालु जम्मू पहुंचने लगे हैं। भगवतीनगर बेस कैंप से 2 जुलाई को पहला जत्था रवाना होगा और इसके साथ ही 38 दिनों तक चलने वाली यह पवित्र यात्रा आधिकारिक रूप से शुरू हो जाएगी।
अब तक 3.5 लाख श्रद्धालुओं का रजिस्ट्रेशन
इस साल अब तक करीब साढ़े तीन लाख श्रद्धालु पंजीकरण करा चुके हैं। जिन्होंने ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन नहीं कराया था, उनके लिए जम्मू में ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन शुरू कर दिया गया है। प्रशासन ने स्पेशल पंजीकरण सेंटर बनाए हैं, जहां मेडिकल और अन्य जांच के बाद तुरंत अनुमति दी जा रही है।
सुरक्षा में ‘Z’ स्तर की तैयारी: 50 हजार से ज्यादा जवान तैनात
जम्मू-कश्मीर में इस बार यात्रा को लेकर बेहद सख्त सुरक्षा बंदोबस्त किए गए हैं। खासकर जम्मू-श्रीनगर हाईवे (NH-44) पर मल्टी-लेयर सिक्योरिटी लागू है।
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CRPF का डॉग स्क्वॉड, चेहरा पहचानने वाले सिस्टम (FRS) और
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जैमर और ड्रोन मॉनिटरिंग की सहायता से यात्रा की हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है।
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581 कंपनियों की सशस्त्र बल टुकड़ियाँ यानी 42,000 से अधिक जवान सुरक्षा में तैनात हैं।
रविवार को सेना, पुलिस, SDRF और CRPF ने लैंडस्लाइड संभावित इलाकों में मॉक ड्रिल भी किया, ताकि आपात स्थिति से निपटा जा सके।
श्रद्धालु बोले: “बाबा साथ हैं, आतंक का कोई डर नहीं”
हाल ही में पहलगाम हमले के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ।
रजिस्ट्रेशन के दौरान एक श्रद्धालु ने कहा, “आतंकवाद हमें रोक नहीं सकता। बाबा अमरनाथ की कृपा से हम पूरी श्रद्धा से यात्रा पूरी करेंगे।”
दूसरे श्रद्धालु बोले, “हमारी मौजूदगी ही सरकार और सेना के लिए संदेश है कि डर के आगे श्रद्धा है।”
यात्रा के दो रास्ते: कौन-सा आपके लिए बेहतर है?
1. पहलगाम रूट (48 किमी)
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गुफा तक पहुंचने में 3 दिन लगते हैं।
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रास्ता सरल है, खड़ी चढ़ाई नहीं।
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पड़ाव: चंदनवाड़ी → पिस्सू टॉप → शेषनाग → पंचतरणी → गुफा
2. बालटाल रूट (14 किमी)
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एक दिन में यात्रा संभव लेकिन रास्ता कठिन।
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बुजुर्गों और बीमार लोगों के लिए जोखिमभरा।
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तीखे मोड़, संकरे ट्रैक और तेज़ चढ़ाई वाला मार्ग।

तैयारी और जरूरी डॉक्यूमेंट्स
अमरनाथ यात्रा आसान नहीं है। श्रद्धा के साथ शारीरिक मजबूती भी जरूरी है।
साथ रखें
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मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट
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RFID कार्ड और आधार कार्ड
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चार पासपोर्ट साइज फोटो
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ट्रैवल एप्लिकेशन फॉर्म
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ट्रैकिंग स्टिक, ऊनी कपड़े, बारिश का सामान और जरूरी दवाएं
करें ये प्रैक्टिस
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हर दिन 4-5 किमी पैदल चलें
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प्राणायाम और सांस की कसरतें करें
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ऊंचाई वाले क्षेत्रों के लिए खुद को तैयार करें
अमरनाथ गुफा और हिम शिवलिंग: विज्ञान और आस्था का संगम
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समुद्र तल से 3888 मीटर की ऊंचाई पर स्थित अमरनाथ गुफा में प्राकृतिक रूप से बनने वाला हिमानी शिवलिंग तीर्थ का केंद्र है।
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सूरज की रोशनी सीधे नहीं पड़ती, इसलिए यहां का तापमान 0°C से भी कम रहता है।
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ऊपर से टपकता हुआ बर्फीला पानी जमकर Stalagmite (हिम शिवलिंग) का रूप लेता है।

अमरनाथ यात्रा सिर्फ एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि भारत की एकजुटता, साहस और श्रद्धा की मिसाल है। इस बार सुरक्षा कड़ी है, इंतजाम बेहतर हैं और श्रद्धालुओं का मनोबल ऊंचा है। बाबा बर्फानी के दरबार में आस्था की गूंज फिर से सुनाई देने लगी है। अगर आप अब तक यात्रा पर जाने की सोच रहे हैं, तो ये सही समय है।
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