Alwar district council meeting protest :राजस्थान के अलवर में जिला परिषद की बैठक चर्चा का केंद्र बन गई जब एक पार्षद हाथ में कटोरा लेकर बैठक में पहुंचा। पार्षद ने यह कदम सरकार की नीतियों और विकास कार्यों की धीमी रफ्तार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के रूप में उठाया। कटोरा लेकर पहुंचने वाले इस जनप्रतिनिधि ने कहा कि जब सरकार विकास कराने में विफल है, तो अब जनता से भीख मांगकर ही छोटे-मोटे काम करने की कोशिश करेंगे।
बैठक शुरू होने से पहले ही यह दृश्य वहां मौजूद अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और मीडिया का ध्यान खींचने लगा। पार्षद ने कटोरा मेज पर रखते हुए कहा,कि बजट और योजनाओं के नाम पर सिर्फ घोषणाएं की जाती हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कुछ भी नहीं हो रहा है।
विकास कार्यों पर उठे सवाल
पार्षद का कहना था कि सरकार और प्रशासन ग्रामीण इलाकों में विकास कार्यों को लेकर गंभीर नहीं हैं। सड़कों की हालत खराब, पेयजल योजनाएं अटक गई, और कई पंचायतों में स्कूलों व आंगनवाड़ी केंद्रों की स्थिति चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे समय बीत रहा है, ग्रामीण जनता का भरोसा तंत्र से उठता जा रहा है।
अगर हमें विकास कार्यों के लिए पैसा नहीं मिलेगा, तो अब हमें मजबूर होकर जनता से भीख मांगनी पड़ेगी। सरकार से उम्मीदें खत्म हो रही हैं।
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प्रशासन की सफाई और प्रतिक्रिया
विरोध के बाद जिला परिषद के अधिकारियों ने कहा कि कई योजनाओं पर काम चल रहा है और कुछ परियोजनाएं प्रक्रिया में हैं, जिनके पूरा होने पर जनता को राहत मिलेगी। अधिकारी ने बताया कि बजट की स्वीकृति और तकनीकी कारणों के चलते कुछ कार्य रुकावट में हैं, लेकिन आने वाले महीनों में स्थिति में सुधार होगा।
हालांकि, पार्षदों ने प्रशासनिक दावों पर सवाल उठाए और कहा कि कागज़ पर योजनाएं चल रही हैं, जमीनी हकीकत कुछ और ही है।
विपक्षी पार्टियों ने भी उठाई आवाज़
इस घटना के बाद विपक्षी दलों के नेताओं ने भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जब जनप्रतिनिधि ही कटोरा लेकर भीख मांगने की बात करने लगें, तो यह प्रशासनिक तंत्र की असफलता का सबसे बड़ा प्रमाण है। कांग्रेस नेताओं ने कहा,कि भाजपा सरकार केवल घोषणाओं में व्यस्त है, जबकि आमजन की समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं।
वहीं, भाजपा के जिला पदाधिकारियों ने कहा,कि विपक्ष केवल राजनीति कर रहा है और सरकार चरणबद्ध तरीके से विकास कार्य पूरे कर रही है।
जनता की प्रतिक्रिया
सोशल मीडिया पर भी यह घटना तेजी से वायरल हुई। कई लोगों ने पार्षद के इस कदम को “सत्य का प्रतीक” बताया, तो कुछ ने इसे “राजनीतिक नाटक” कहा।
हालांकि, इस घटना ने यह संदेश जरूर दिया कि ग्रामीण विकास को लेकर स्थानीय स्तर पर गहरी असंतुष्टि है।
कटोरा लेकर विरोध करना अब चर्चा का विषय बन चुकी है आखिर जनता और जनप्रतिनिधियों को विकास के लिए “भीख मांगने” जैसी बात कहनी क्यों पड़ रही है।
