₹45 करोड़ में अमेरिका को मिला था खजाना!

कभी ‘बर्फीला बोझ’ कहा, आज बना कूटनीति का सेंटर स्टेज!
इतिहास कई बार हमें आईना दिखाता है। कभी हम जिन चीजों को ठुकरा देते हैं, समय उनके महत्व को ऐसा निखारता है कि आंखें चौंधिया जाती हैं। अलास्का, वो धरती जिसे रूस ने सिर्फ ₹45 करोड़ में अमेरिका को बेच दिया था, आज दुनिया की दो सबसे ताकतवर शख्सियतों व्लादिमीर पुतिन और डोनाल्ड ट्रम्प की मुलाकात का मंच बनने जा रहा है।
15 अगस्त 2025 को अलास्का, जो कभी सिवार्ड्स की मूर्खता कहलाता था, अब उम्मीदों का केंद्र बना है क्या यहां से यूक्रेन युद्ध की समाप्ति की शुरुआत हो सकती है?
इतिहास की सबसे सस्ती और सबसे भारी सौदेबाज़ी
30 मार्च 1867। रूस के जार अलेक्जेंडर द्वितीय ने एक दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर किया और अलास्का की 1.7 मिलियन वर्ग किलोमीटर ज़मीन अमेरिका को सिर्फ 7.2 मिलियन डॉलर यानी लगभग ₹45 करोड़ में सौंप दी।
आपको जानकर हैरानी होगी कि ये क्षेत्रफल भारत के सबसे बड़े राज्य राजस्थान से 5 गुना ज़्यादा है!
क्यों बेचा रूस ने अलास्का?
- डर था कि ब्रिटेन के साथ युद्ध में अमेरिका अलास्का छीन लेगा।
- इतने बड़े क्षेत्र को सैन्य सुरक्षा देना रूस के लिए संभव नहीं था।
- आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहा था रूस।
- लोगों ने विरोध किया, पर जार ने फैसला लिया।
आज बना ‘तेल, सोना और ताकत’ का खज़ाना
जब अमेरिका ने अलास्का खरीदा, तो लोगों ने ताना मारा सिवार्ड्स फॉली (Seward’s Folly)। ये नाम उस विदेश मंत्री पर कटाक्ष था जिसने ये सौदा किया। कहा गया कि इतनी बर्फ और जंगली ज़मीन का क्या करेंगे?
पर समय के साथ पता चला कि यही इलाका तो है तेल और गैस के असीम भंडार का घर। सोना, हीरे और यूरेनियम जैसी खनिज संपदा से भरपूर। सामरिक दृष्टि से इतना अहम कि रूस की सैन्य सीमा से सिर्फ 88 किमी दूर है।
ट्रम्प पुतिन की मुलाकात और रूस की कसक
अब 2025 में, जब ट्रम्प और पुतिन यूक्रेन युद्ध को लेकर बातचीत के लिए इसी अलास्का में मिलने जा रहे हैं, तो इतिहास अपने पूरे भावनात्मक वजन के साथ लौटता है।कभी जिसे रूस ने बेच दिया, अब वहीं उसका सबसे करीबी मिलिट्री बेस है। यहां से रूस की गतिविधियों पर नजर रखना अमेरिका के लिए आसान है।

और रूस के लिए? आज भी अलास्का की बिक्री एक ‘राष्ट्रीय भूल’ की तरह याद की जाती है। 2014 में क्रीमिया कब्जे के बाद रूस में ऐसे गाने गूंजे जिनमें कहा गया एक दिन पुतिन अलास्का भी वापस लाएंगे।
जार की मौत और राजनीतिक साज़िश
कुछ इतिहासकार मानते हैं कि जार अलेक्जेंडर द्वितीय की मौत, अलास्का की बिक्री से उपजे राजनीतिक असंतोष का ही नतीजा थी।
1867 में सौदा हुआ और अगले कुछ सालों में कई हत्या के प्रयास हुए, अंत में 1881 में विंटर पैलेस के बाहर बम से हत्या कर दी गई। रूस ने कभी आधिकारिक तौर पर ये नहीं माना, लेकिन सवाल अब भी तैरता है।
इतिहास जब वर्तमान से मिलता है, तो भविष्य करवट लेता है
15 अगस्त को जब ट्रम्प और पुतिन अलास्का की धरती पर एक दूसरे से मिलेंगे, तो ये सिर्फ एक कूटनीतिक बैठक नहीं होगी। ये इतिहास की उस गलती का मौन गवाह होगा जिसे रूस आज तक नहीं भूल पाया। और शायद, ये उस नई शुरुआत की जमीन बन जाए
जहां से युद्ध खत्म हों, शांति की बर्फ गले, और इंसानियत फिर जीत जाए।
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