अखिलेश यादव वायरल वीडियो: अखिलेश यादव की तारीफ करना छात्र को पड़ा भारी, तालिब ने लगाए पुलिस पर उत्पीड़न के आरोप
“जो अखिलेश से टकराएगा, रेला जाएगा” — सोशल मीडिया पोस्ट बना मुसीबत की वजह
अखिलेश यादव वायरल वीडियो: शाहजहांपुर के मऊ गांव का रहने वाला इंटर का छात्र तालिब, अचानक सुर्खियों में आ गया। वजह बना उसका एक सोशल मीडिया वीडियो, जिसमें उसने कहा था — “जो अखिलेश यादव से टकराएगा, रेला जाएगा।” यह वीडियो वायरल हुआ और तालिब का दावा है कि इसके बाद उसे अल्हागंज थाना पुलिस ने फोन कर बुलाया, हवालात में बैठाया और शांतिभंग की धारा में चालान किया गया।
अखिलेश यादव वायरल वीडियो: अखिलेश की प्रेस कॉन्फ्रेंस में छात्र ने बयां किया अपना दर्द
सोमवार को लखनऊ में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान तालिब मंच पर पहुंचा और अपनी बात रखी। उसने बताया कि अखिलेश यादव की तारीफ करने पर पुलिस ने उसे उत्पीड़ित किया, 20 हजार रुपये भी मांगे गए और करीब 40 मिनट तक थाने में बैठाकर पूछताछ की गई। तालिब की यह बात सुनते ही अखिलेश समेत पत्रकार और कार्यकर्ता हंसने लगे, लेकिन मामला गंभीर था।
अखिलेश यादव वायरल वीडियो: https://x.com/pawanks1997/status/1942253232551542862
“बीस हजार देने पड़े, पोस्ट डिलीट कर मांगी माफ़ी” — तालिब का दावा
तालिब का आरोप है कि पुलिस ने उसे चेतावनी दी कि अगर वह पोस्ट नहीं हटाता तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। वह कहता है कि —
“डर के कारण मैंने पोस्ट डिलीट की और माफी भी मांगी। इसके बाद भी बीस हजार रुपये की मांग की गई जो मुझे देने पड़े।”
छात्र ने सपा के जिलाध्यक्ष तनवीर खां से भी मदद मांगी, जिन्होंने फोन पर थाना प्रभारी से बात की और तब जाकर मामला शांत हुआ।
अखिलेश यादव वायरल वीडियो: पुलिस और एसपी का इनकार — कहा, जांच के आदेश दिए गए हैं
थानाध्यक्ष ओम प्रकाश ने तालिब के सभी आरोपों को निराधार बताया। उनका कहना है कि—
“एक महिला की शिकायत पर शांतिभंग में चालान किया गया था। किसी भी पोस्ट पर कार्रवाई नहीं हुई और न ही कोई रुपये की मांग की गई।”
एसपी राजेश द्विवेदी ने बताया कि वायरल वीडियो को संज्ञान में लेकर सीओ जलालाबाद को जांच सौंपी गई है। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।
सपा जिलाध्यक्ष तनवीर खां ने भी स्वीकार किया कि छात्र ने मदद मांगी थी और थाना प्रभारी से बात कर मामला सुलझाया गया, लेकिन 20 हजार रुपये की बात उन्हें पहले नहीं पता थी।
इस घटना ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है — क्या किसी राजनेता की तारीफ करना भी आज के दौर में जोखिम भरा बनता जा रहा है?
अगर तालिब के आरोप सही हैं, तो यह ना सिर्फ लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन है, बल्कि सोशल मीडिया फ्रीडम पर भी सीधा प्रहार है।
वहीं दूसरी ओर, अगर पुलिस का पक्ष सही है तो यह स्पष्ट करना ज़रूरी है कि अफवाहों को हवा देना भी सही नहीं है।
अब सभी की निगाहें हैं जांच रिपोर्ट पर, जो तय करेगी कि सच्चाई किस ओर है।
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