
एअर इंडिया के दो पायलटों ने तय नियमों से ज्यादा समय तक विमान उड़ाया, जिसके बाद DGCA ने एयरलाइन को चेतावनी जारी की है। यह मामला मई 2025 का है, जब बेंगलुरु-लंदन रूट पर दो अंतरराष्ट्रीय फ्लाइट्स में पायलटों ने निर्धारित 10 घंटे की सीमा से ज्यादा उड़ान भरी।
DGCA की कार्रवाई
जून 2025 में DGCA ने एयर इंडिया को कारण बताओ नोटिस भेजा। एयरलाइन का जवाब “संतोषजनक नहीं” माना गया। अब चेतावनी दी गई है कि भविष्य में ऐसा दोबारा नहीं होना चाहिए।
DGCA के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा,
“यह केवल नियमों का उल्लंघन नहीं, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा से सीधा जुड़ा मुद्दा है।”
एयर इंडिया का पक्ष
एयर इंडिया ने सफाई में कहा
बॉर्डर क्षेत्र में एयर स्पेस बंद होने से फ्लाइट को लंबा रूट लेना पड़ा, जिससे यह स्थिति बनी। अब हम पूरी तरह नियमों का पालन कर रहे हैं।
पायलट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (FDTL) क्या है?
DGCA के नियमों के अनुसार
| शर्त | सीमा |
|---|---|
| 1 दिन में उड़ान का समय | अधिकतम 10 घंटे |
| प्रत्येक उड़ान के बाद आराम | कम से कम 12 घंटे |
| 7 दिन में | अधिकतम 35 घंटे |
| 30 दिन में | अधिकतम 125 घंटे |
| 365 दिन में | अधिकतम 1000 घंटे |
इसका मकसद है पायलट की थकान रोकना और फ्लाइट सेफ्टी सुनिश्चित करना।
सुरक्षा क्यों है बड़ा मुद्दा?
थके हुए पायलट निर्णय लेने में देरी कर सकते हैं, रनवे पर गलतियां कर सकते हैं, आपात स्थितियों में तुरंत प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो सकते हैं. इसलिए ICAO, FAA और DGCA जैसी एजेंसियां इस पर सख्त नियम बनाती हैं।
DGCA के अधिकार क्या हैं?
DGCA भारत में उड़ान से जुड़ी हर गतिविधि की निगरानी करता है। इसमें शामिल हैं पायलट की ट्रेनिंग और सर्टिफिकेशन, एयरलाइन के ऑपरेशनल प्रोटोकॉल, सेफ्टी ऑडिट,और ऐसे मामलों में जुर्माना, चेतावनी या लाइसेंस सस्पेंशन

क्या सीखने की जरूरत है?
एयरलाइंस को रोस्टरिंग में सावधानी बरतनी चाहिए किसी तकनीकी या एयर स्पेस समस्या की स्थिति में अल्टरनेट क्रू व्यवस्था होनी चाहिए DGCA को भी स्वतंत्र निगरानी सिस्टम और डिजिटल लॉग्स की जांच और तेज करनी चाहिए
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