air india dgca audit: एक दिन अचानक खबर मिली कि देश की मुख्य विमान सुरक्षा संस्था DGCA ने एयर इंडिया के बारे में आधिकारिक ऑडिट रिपोर्ट में 51 से 100 तक खामियां पाई हैं। एक बड़े ब्रांड में इतने खतरनाक संकेत मिले हैं 7 ‘Level‑1’ यानी सबसे गंभीर रिपोर्ट।
यह सिर्फ संख्या नहीं, यात्रियों की ज़िंदगियाँ हैं। और जब रिपोर्ट में सामने आया कि पायलट ट्रेनिंग, रॉस्टरिंग, क्रू की थकान, उपकरण जांच मुश्किल से एक‑एक खामियों की लंबी कहानी है तो भीतर एक हलचल हुई।
क्या कहती है रिपोर्ट
जुलाई 2025 में DGCA ने एयर इंडिया का ऑडिट किया। रिपोर्ट में कहीं लिखा है 51 safety lapses, वहीं कुछ स्रोत कहते हैं करीब 100 observations भी हैं। इनमें से 7 गंभीर Level‑1 खामियां थीं जिन्हें 30 जुलाई तक ठीक करना होगा; बाकी 44 को 23 अगस्त तक सुधारा जाए।
air india dgca audit: खामियों में क्या-क्या?
- कुछ Boeing 787/777 पायलट अपनी mandatory monitoring duties पूरी नहीं कर पाए।
- प्रशिक्षण केन्द्रों में प्रयोग हो रहे simulators अप्रूव्ड नहीं थे।
- कई अंतर्राष्ट्रीय उड़ानों में फ्लाइट में पर्याप्त cabin crew भी नहीं थे।
- रॉस्टरिंग सिस्टम में चेतावनी नहीं थी जिससे क्रू fatigue के बावजूद उड़ान भरते रहे।

सुरक्षा और जवाबदेही
सोचिए इतनी खामियों के बावजूद एयर इंडिया ने सिर्फ कहा: हम पूरी तरह पारदर्शी थे, रिपोर्ट मिल गई है, जवाब देंगे। लेकिन क्या पहले warning नहीं मिली थीं? DGCA ने इस साल पहले ही तीन वरिष्ठ अधिकारियों को हटाया, चार show-cause notices दिए, पक्ष पलटने की जहमत नहीं उठाई। जिस एयरलाइन का लक्ष्य world‑class बनना था, वही internal audits में फर्जी बहाना निगेटिव रिपोर्ट के लिए तैयार कर रही थी। The Hindu की रिपोर्ट बताती है कि 13 spot checks में से सभी fabricated हो सकती थीं।
हादसे के बाद जांच का मिजाज़
12 जून को एयर इंडिया Boeing 787 का AI‑171 क्रैश हुआ 270 लोगों की मौत। preliminary AAIB रिपोर्ट बताती है कि take-off के कुछ सेकंड बाद दोनों इंजनों की fuel supply बंद हो गयी थी। कॉकपिट में पायल्ट confused थे एक ने पूछा, तुमने क्यों बंद किया?, दूसरे का जवाब था, मैंने नहीं किया।
ऐसे में जब DGCA कहता है कि recurrent training gaps हैं, fatigue management में गड़बड़ी है, safety checks inconsistent हैं तो सिर्फ संख्या नहीं, यह जीवन‑मूल्यांकन की बात बन जाती है।
व्यक्तिगत प्रतिक्रिया और मानवीय नज़रिए
मैं एक आम यात्री हूं, जिसने खुद कई बार एयर इंडिया में यात्रा की है। उन बैठकों और उड़ानों के बीच लोग सोफे से नीचे खिसक जाते हैं, ट्रे पर बच्चों के साथ बैठे होते हैं, वृद्ध, घायल, उम्मीद लिए खड़े होते हैं।

जब यह रिपोर्ट सामने आई, एक धड़कन ज़रूर तेज हुई क्या मैं सुरक्षित महसूस कर सकता हूँ? क्या मेरे परिवार की ज़िंदगी किसी तकनीकी कमी या training gap की वजह से खतरे में पड़ सकती है? ये रिपोर्ट़ एक चेतावनी थी किसी सिस्टम या कंपनी की जिम्मेदारी बताने की नहीं, बल्कि आम यात्रियों की सुरक्षा की।
सुधार, भरोसा और सतर्कता की जरूरत
DGCA ने स्पष्ट अल्टीमेटम दिया है: Level‑1 दोष 30 जुलाई तक ठीक करें, बाक़ी खामियों का समाधान 23 अगस्त तक हो। एयर इंडिया ने स्वीकार किया है और सुधार करने की बात कही। लेकिन अब सवाल ये है: क्या यह सिर्फ अनुपालन लेने का दौर है, या कोई वास्तविक सुधार शुरू होगा?
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