टीबी जैसी गंभीर बीमारी की पहचान अब पहले से कहीं अधिक तेज और आसान हो गई है। स्वास्थ्य विभाग ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीनों के जरिए घर-घर जाकर जांच की नई व्यवस्था शुरू की है। इस तकनीक की मदद से महज 5 मिनट में फेफड़ों का एक्स-रे और उसकी रिपोर्ट तैयार हो रही है।
घर पर ही जांच, तुरंत रिपोर्ट की सुविधा
अब तक टीबी के लक्षण दिखने पर मरीजों को जांच के लिए केंद्रों पर जाना पड़ता था, जहां एक्स-रे और रिपोर्ट में समय लगता था। ग्रामीण क्षेत्रों में यह सुविधा सीमित होने के कारण कई मरीज समय पर जांच नहीं करा पाते थे.नई व्यवस्था के तहत स्वास्थ्य कार्यकर्ता सीधे घर पहुंचकर जांच करेंगे और मौके पर ही रिपोर्ट उपलब्ध कराएंगे। इससे मरीजों को अस्पतालों की लंबी कतारों से राहत मिलेगी।
मध्यप्रदेश में बढ़ रहे टीबी के मामले
प्रदेश में टीबी मरीजों की संख्या लगातार चिंता बढ़ा रही है। वर्ष 2024 में भोपाल जिले में 12,818 मरीज सामने आए थे, जो 2025 में बढ़कर 13,224 हो गए।वहीं पूरे राज्य में 2025 के दौरान करीब 1.52 लाख मरीज चिन्हित किए गए हैं, जबकि लगभग 12 प्रतिशत मरीज अब भी जांच के दायरे से बाहर हैं। देश में टीबी के मामलों में मध्यप्रदेश तीसरे स्थान पर है।
ग्रामीण क्षेत्रों में भी पहुंचेगी तकनीक
ग्रामीण इलाकों में इस सुविधा को विस्तार देने के लिए विशेष शिविर लगाए जाएंगे। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च द्वारा विकसित ‘डीपसीएक्सआर V1.1’ तकनीक का 54 हजार लोगों पर परीक्षण किया गया, जिसमें करीब 99 प्रतिशत मामलों में सटीक परिणाम मिले हैं।
तेज जांच से मिलेगा समय पर इलाज
नई तकनीक के जरिए न केवल जांच की प्रक्रिया तेज होगी, बल्कि मरीजों को समय पर इलाज भी मिल सकेगा। इससे टीबी के संक्रमण को फैलने से रोकने में मदद मिलेगी और 2030 तक टीबी उन्मूलन के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में यह पहल महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
