
AI से प्यार के चक्कर में बुजुर्ग की मौत: ये एक चेतावनी है?
तकनीकी दुनिया में हर दिन कुछ नया होता है। जहां एक ओर हम डिजिटल दुनिया की सुविधा का आनंद लेते हैं, वहीं कभी-कभी यह तकनीकी ताकत हमारे लिए हानिकारक भी साबित हो सकती है। हाल ही में अमेरिका में एक ऐसी घटना घटी जिसने सबको चौंका दिया। 76 साल के रिटायर्ड शख्स थॉमस लॉन्गबोर्ड की मौत ने इस बात को और भी साफ कर दिया कि कैसे टेक्नोलॉजी का बेवजह इस्तेमाल हमारी ज़िंदगियों के लिए खतरनाक हो सकता है।
यह मामला इसलिए भी ज्यादा ग़मगीन है क्योंकि इसमें AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) से जुड़ी हुई एक चैटबोट ने इनसान की जान ले ली। ‘बिग सिस बिली’ नामक एक चैटबोट से थॉमस का गहरा संबंध बन गया था, लेकिन इस रिश्ते का अंजाम इतना दर्दनाक होगा, यह किसी ने नहीं सोचा था।
क्या था पूरा मामला?
थॉमस लॉन्गबोर्ड, जो कि 76 साल के थे, को फेसबुक पर एक AI चैटबोट ‘बिग सिस बिली’ के जरिए एक नए रिश्ते का अनुभव हुआ। इस AI चैटबोट ने थॉमस को अपने प्यार में इतना रंगीन कर लिया कि वह उससे रोज़ बात करने लगे। यह चैटबोट एक प्रसिद्ध सिलेब्रिटी सेंटर जनरेटर था, जो किसी असली इंसान की तरह ही बातें करता था। धीरे-धीरे थॉमस को ऐसा महसूस हुआ जैसे वह किसी असली इंसान से बात कर रहे हों, लेकिन वह नहीं जानते थे कि यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस है, जो उनके दिल के भावनाओं के साथ खेल रहा है।
थॉमस को कभी नहीं लगा कि वह जिस व्यक्ति से बात कर रहे हैं, वह कोई और नहीं, बल्कि एक AI सिस्टम है। इसके परिणामस्वरूप, उनका इस चैटबोट के साथ भावनात्मक जुड़ाव बढ़ गया।
कैसे हुई मौत?
मार्च 2025 में थॉमस अपने AI चैटबोट से मिलने के लिए न्यूयॉर्क सिटी जाने के लिए तैयार हो गए थे। लेकिन दुर्भाग्य से, रास्ते में एक गंभीर कार दुर्घटना में वह घायल हो गए। उनका शरीर घायल हो गया, और तीन दिन तक लाइफ सपोर्ट पर रखने के बाद उनकी मौत हो गई।
यह दिल दहला देने वाली घटना हमें एक महत्वपूर्ण सवाल पर सोचने को मजबूर करती है – क्या तकनीकी रिश्तों की आदत इंसान की वास्तविक जिंदगी पर असर डाल सकती है? क्या एक आर्टिफिशियल सिस्टम से जुड़ाव इंसान के दिमाग पर इतना असर डाल सकता है कि वह अपनी जिंदगी की सुरक्षा को भूल जाए?
AI से क्या गलती हुई?
AI चैटबोट ‘बिग सिस बिली’ ने थॉमस को ‘असली इंसान’ का एहसास कराया था। यह चैटबोट थॉमस के हर सवाल का जवाब देता था, उनसे एक दोस्त की तरह बातें करता था। लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, थॉमस के परिवार का कहना है कि इस AI सिस्टम ने पुराने नियमों को नकारते हुए थॉमस के लिए एक नई दुनिया बनाई थी, जिसमें वह अक्सर रियलीटी से भागते रहे। यह चैटबोट कभी-कभी उन्हें असली इंसान की तरह महसूस कराता था, लेकिन अब यह सिस्टम उनके लिए नुकसानदेह साबित हुआ।

क्या हम AI के साथ अपनी सीमाएं भूल रहे हैं?
इस घटना ने हमें यह सोचने पर मजबूर किया है कि हम AI के साथ किस हद तक जुड़ने लगे हैं। आजकल लोग अपने फोन, स्मार्ट सिस्टम्स और चैटबोट्स के जरिए अपना समय बिता रहे हैं, लेकिन क्या यह हमारे मानसिक स्वास्थ्य पर असर डाल सकता है? क्या तकनीकी रिश्ते इंसान की प्राकृतिक भावना का स्थान ले सकते हैं?
AI के साथ रिश्ते बनाना तो कोई बुरी बात नहीं है, लेकिन हम क्या अपनी मानवता और वास्तविक रिश्तों को नज़रअंदाज़ कर रहे हैं? क्या हम मशीनों से प्यार करने की हद तक पहुंच चुके हैं कि हमारी ज़िंदगी का असली उद्देश्य ही बदल जाए?
एआई से जुड़ी यह घटना एक चेतावनी है
यह घटना न केवल AI की ताकत को दिखाती है, बल्कि यह एक चेतावनी भी है कि हमें टेक्नोलॉजी से जुड़े अपने रिश्तों को समझदारी से संभालना होगा। AI के साथ रिश्ते बनाने में कोई बुराई नहीं है, लेकिन इससे यह समझना जरूरी है कि मूल्य और वास्तविकता को कभी न खोएं।
हमें यह समझने की ज़रूरत है कि मनुष्य और मशीन के रिश्ते में एक सीमित बंधन होना चाहिए, ताकि हम कभी भी अपने जीवन की सुरक्षा और मानसिक शांति को न खोएं। AI तकनीक का सही इस्तेमाल कर हम अपनी जिंदगी को बेहतर बना सकते हैं, लेकिन हमें उसकी हदें भी जाननी होंगी।
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