AI के नाम पर बेरोजगारी की सुनामी
ai layoffs 2025 tcs amazon microsoft: नई दिल्ली। दुनिया की नामी टेक कंपनियों में 2025 अब तक का सबसे कठिन साल साबित हो रहा है। Layoffs.fyi की रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी से अक्टूबर के बीच 218 टेक कंपनियों ने 1.12 लाख से अधिक कर्मचारियों को नौकरी से निकाला है।
छंटनी की यह लहर सिर्फ छोटे स्टार्टअप तक सीमित नहीं रही, बल्कि…
- TCS,
- माइक्रोसॉफ्ट,
- अमेजन,
- गूगल,
और UPS जैसी दिग्गज कंपनियां भी इस लिस्ट में शामिल हैं। कंपनियों का तर्क है AI तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल, घटती अर्थव्यवस्था और लागत में कटौती की वजह से ये कदम जरूरी था। लेकिन असली सवाल यह है कि क्या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इंसानों के लिए खतरा बनता जा रहा है?
TCS की अब तक की सबसे बड़ी छंटनी
भारत की सबसे बड़ी आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) ने सितंबर 2025 तक 19,755 कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाया। यह कंपनी के इतिहास की सबसे बड़ी छंटनी मानी जा रही है। TCS ने बताया कि अब वह ऑटोमेशन और AI आधारित कार्यशैली की ओर बढ़ रही है, इसलिए मिड और सीनियर लेवल के कई पद समाप्त किए जा रहे हैं। एक पूर्व कर्मचारी ने बताया,
“हमने कंपनी को 10 साल दिए, लेकिन मशीनों ने पलभर में हमें बेकार बना दिया।”
फिलहाल TCS का हेडकाउंट घटकर 6 लाख से नीचे पहुंच गया है।
अमेजन, माइक्रोसॉफ्ट और इंटेल में भी तगड़ी मार
अमेजन ने इस साल 14,000 कॉर्पोरेट कर्मचारियों की छंटनी की घोषणा की है। कंपनी के CEO एंडी जेसी ने कहा कि अमेजन को अब “दुनिया की सबसे बड़ी स्टार्टअप” की तरह चलाना होगा, यानी कम लोग, ज्यादा काम। मीडिया रिपोर्ट्स का कहना है कि यह आंकड़ा जल्द ही 30 हजार तक पहुंच सकता है।
माइक्रोसॉफ्ट ने भी करीब 9,000 कर्मचारियों को हटाया है। कंपनी का कहना है कि वह अपने संसाधन अब AI और क्लाउड सेक्टर में केंद्रित कर रही है, इसलिए कुछ विभागों को छोटा करना जरूरी है।
वहीं, इंटेल ने तो एक झटके में 24,000 नौकरियां खत्म कर दीं। कंपनी का कहना है कि चिप मार्केट की मांग घट रही है और AI चिप्स की रेस में पीछे रह जाने से उसे लागत कम करनी पड़ी। इस कदम से अमेरिका, जर्मनी और पोलैंड जैसे देशों में हजारों परिवार प्रभावित हुए हैं।
AI के कारण खत्म हो रही हैं पारंपरिक नौकरियां
गूगल, मेटा और सेल्सफोर्स जैसी कंपनियों ने भी छंटनी की है। गूगल ने क्लाउड और एंड्रॉयड टीम से सैकड़ों लोगों को निकाला। मेटा (फेसबुक) ने अपनी AI डिविजन से 600 कर्मचारियों को हटाते हुए कहा कि अब छोटी टीमों में बड़े काम पूरे किए जाएंगे।
सेल्सफोर्स ने 4,000 सपोर्ट स्टाफ हटाए क्योंकि अब उसका AI सिस्टम कस्टमर चैट्स का आधा काम खुद कर लेता है।
वहीं UPS ने एक झटके में 48,000 कर्मचारियों को निकालकर 93 सुविधाएं बंद कर दीं। AI आधारित ऑटोमेशन से कंपनियों को तेज और सटीक नतीजे मिल रहे हैं, लेकिन इससे लाखों नौकरियां खतरे में पड़ गई हैं।
टेक्नोलॉजी की जीत या इंसान की हार?
ये छंटनियां सिर्फ आंकड़े नहीं हैं, ये उन लोगों की कहानियां हैं जिनकी ज़िंदगी पल भर में बदल गई। AI जहां नई संभावनाएं खोल रहा है, वहीं यह सवाल भी खड़ा कर रहा है क्या मशीनें इंसानों की जगह ले रही हैं? कई एक्सपर्ट मानते हैं कि आने वाले 3 से 5 सालों में AI-सक्षम सिस्टम्स कंपनियों में 30% तक नौकरियां खत्म कर सकते हैं। लेकिन कुछ विश्लेषक यह भी कहते हैं कि नई स्किल्स और री-ट्रेनिंग से नए अवसर भी पैदा होंगे।
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