ai classroom education india: सुबह की कक्षा वो पुरानी कॉपी वही डेस्क सब कुछ वैसा ही है लेकिन अब पढ़ाई के उस अनुभव में एक नया किरदार भी जुड़ गया है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस। शायद आप ध्यान ही न दें लेकिन यह बदलाव रोज़-रोज़ की सीख को धीरे-धीरे बदल रहा है।
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अब AI भी क्लासरूम का हिस्सा
कुछ साल पहले “ऑनलाइन टूल” सुनकर कई लोग सिर पकड़ते थे. पर आज वही टूल्स बच्चों की रोजमर्रा की पढ़ाई का हिस्सा बन गए हैं AI-आधारित एप्स अब होमवर्क समझाते हैं, कमजोर बिंदुओं को पहचानते हैं, हर बच्चे के लिए अलग-अलग सुझाव देते हैं और यही छोटे-छोटे बदलाव बड़े असर पैदा कर रहे हैं । दिल्ली के एक स्कूल में अंग्रेज़ी की टीचर रेखा कहती हैं पहले 40 बच्चों वाली कक्षा में हर एक पर ध्यान देना मुश्किल था अब AI रिपोर्ट से सीधे पता चल जाता है कि किसे कहाँ मदद चाहिए यह संवेदनशील डेटा शिक्षक को थका नहीं रहा बल्कि निर्देशन दे रहा है ।
ai classroom education india: छोटे शहर, बड़ा असर
सोचिए AI सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहा है. छोटे कस्बों में भी डिजिटल लर्निंग तेजी से फैल रही है कक्षा 9 के आर्यन बताते हैं अगर टीचर की बात समझ न आए तो AI से दोबारा पूछ लेता हूँ। वो भी बिना झिझक यही सहजता बच्चों को टेक्नोलॉजी से जोड़ रही है ।
फायदे हैं, पर सवाल भी
AI ने पढ़ाई आसान की है इस पर बहस नहीं है मगर सवाल यह भी उठ रहे हैं क्या बच्चे खुद सोचने की आदत खो देंगे? क्या स्क्रीन पर समय बढ़ने से जीवन असंतुलित होगा? शिक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि AI को सहायक रहना चाहिए प्रतिनिधिनहीं । हम एक ऐसे दौर में हैं जहाँ खाली किताबें नहीं, ऐप्स भी शिक्षक की भूमिका निभा रहे हैं। पर असली सीख वही है जो बच्चे को सोचने समझने और अनुभव करने में मदद करे . अगर AI को सही दिशा में इस्तेमाल किया जाए, तो यह सिर्फ पढ़ाई का तरीका बदल देगा बल्कि सीखने का नजरिया भी ।
