पूरा मामला
यह घटना अहमदाबाद के खोखरा इलाके में स्थित सेवंथ डे एडवेंटिस्ट हायर सेकेंडरी स्कूल में मंगलवार, 19 अगस्त 2025 को घटी। प्रारंभिक पुलिस जांच के अनुसार, मृतक छात्र नयन संतानी (15 वर्ष) और आठवीं कक्षा के आरोपी छात्र के बीच कुछ दिनों पहले सीढ़ियों पर धक्का-मुक्की को लेकर मामूली कहासुनी हुई थी। यह छोटा-सा विवाद समय के साथ पुरानी रंजिश में बदल गया। कुछ सूत्रों के अनुसार, दोनों छात्रों के बीच नॉनवेज भोजन को लेकर भी बहस हुई थी, जिसने स्थिति को और तनावपूर्ण बना दिया।

Ahmedabad school murder: चाकूबाजी की घटना
मंगलवार दोपहर को स्कूल की छुट्टी होने के बाद नयन संतानी स्कूल के गेट से बाहर निकल रहा था। तभी आठवीं कक्षा के छात्र ने अपने कुछ साथियों के साथ मिलकर नयन को घेर लिया। बहस जल्द ही हिंसक रूप ले लिया, और आरोपी ने अपने बैग से चाकू निकालकर नयन पर ताबड़तोड़ हमला कर दिया। सीसीटीवी फुटेज में नयन को पेट में चोट लगने के बाद स्कूल की ओर भागते हुए देखा गया। उसे तुरंत मणिनगर के एक निजी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन गंभीर चोटों के कारण बुधवार, 20 अगस्त को उसकी मृत्यु हो गई।

स्कूल प्रशासन पर आरोप
घटना के बाद मृतक के परिजनों और स्थानीय लोगों ने स्कूल प्रशासन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया। उनका कहना है कि स्कूल ने समय पर एम्बुलेंस नहीं बुलाई और खून के धब्बे साफ करने के लिए वॉटर टैंकर मंगवाकर सबूत नष्ट करने की कोशिश की। जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) ने स्कूल को नोटिस जारी कर घटना की सूचना देने में देरी और इसे दबाने के प्रयासों का आरोप लगाया है। स्कूल ने तत्काल छुट्टी घोषित कर दी, जिसे मृतक के सम्मान में बताया गया।

आरोपी की चैट वायरल
घटना के बाद पुलिस ने आरोपी छात्र के मोबाइल फोन की जांच की, जिसमें उसके दोस्त के साथ इंस्टाग्राम पर हुई चैट सामने आई। इस चैट में आरोपी ने न केवल हत्या की बात कबूल की, बल्कि अपने किए पर कोई पछतावा नहीं दिखाया।



प्रदर्शन और लोगों की मांगें
घटना के बाद अहमदाबाद के खोखरा, मणिनगर और इसानपुर इलाकों में व्यापक प्रदर्शन हुए। मृतक छात्र के परिजन, सिंधी समुदाय, अभिभावक, विश्व हिंदू परिषद (VHP), और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के कार्यकर्ता स्कूल परिसर में जमा हुए। बुधवार, 20 अगस्त को 500 से अधिक लोगों की भीड़ ने स्कूल में तोड़फोड़ की, स्कूल बसों और वाहनों को नुकसान पहुंचाया, और स्टाफ के साथ मारपीट की। गुरुवार को भी प्रदर्शन जारी रहे, जिसमें नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) ने स्कूल बंद करने की मांग की। मणिनगर, खोखरा और इसानपुर में करीब 200 स्कूलों ने विरोध में बंद रखा।

Ahmedabad school murder: लोगों की मांगें
- आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई: लोगों ने मांग की कि नाबालिग होने के बावजूद आरोपी को कड़ी सजा दी जाए।
- स्कूल प्रशासन पर कार्रवाई: स्कूल की लापरवाही और सबूत नष्ट करने के प्रयासों के लिए प्रिंसिपल और स्टाफ के खिलाफ केस दर्ज करने की मांग।
- सुरक्षा व्यवस्था में सुधार: स्कूलों में नियमित बैग चेकिंग, सीसीटीवी निगरानी, और सुरक्षा गार्डों की तैनाती को और सख्त करने की मांग।
- सांप्रदायिक तनाव पर नियंत्रण: मृतक के सिंधी समुदाय और आरोपी के मुस्लिम समुदाय से होने के कारण सांप्रदायिक तनाव को रोकने के लिए पुलिस और प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की मांग।
नाबालिग आरोपी का क्या होगा: सजा और नियम
भारत में नाबालिग अपराधियों के लिए जुवेनाइल जस्टिस (केयर एंड प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन) एक्ट, 2015 लागू होता है। इस कानून के तहत, 16 वर्ष से कम उम्र के नाबालिग को वयस्क अपराधी की तरह सजा नहीं दी जा सकती। आरोपी छात्र, जो 13 वर्ष का है, को जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड (JJB) के समक्ष पेश किया जाएगा। JJB में एक मजिस्ट्रेट और दो सामाजिक कार्यकर्ता (जिनमें एक महिला शामिल होती है) होते हैं। इसका उद्देश्य सजा देना नहीं, बल्कि नाबालिग का सुधार और पुनर्वास करना होता है।
पुलिस की कार्रवाई
पुलिस ने आरोपी को हिरासत में ले लिया है और भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 302 (हत्या) के तहत मामला दर्ज किया गया है। जांच को क्राइम ब्रांच को सौंपा गया है, जो सीसीटीवी फुटेज, गवाहों के बयान, और चैट लॉग की जांच कर रही है। पुलिस यह भी जांच रही है कि क्या और कोई छात्र इसमें शामिल है।
बच्चों की हिंसक मानसिकता
Ahmedabad school murder: आरोपी छात्र की वायरल चैट से पता चलता है कि उसे अपने किए पर कोई पछतावा नहीं है। यह व्यवहार असामान्य और खतरनाक है
स्ट्रेन थ्योरी: अमेरिकी समाजशास्त्री रॉबर्ट मार्टिन की स्ट्रेन थ्योरी के अनुसार, जब बच्चों को उनकी इच्छाएं पूरी नहीं होतीं, तो वे मनोवैज्ञानिक दबाव, गुस्सा, और झुंझलाहट में हिंसक व्यवहार अपना सकते हैं।
- सामाजिक प्रभाव: सोशल मीडिया, हिंसक वीडियो गेम्स, और नकारात्मक सहपाठी प्रभाव बच्चों में हिंसक प्रवृत्ति को बढ़ा सकते हैं।
- पारिवारिक और सामाजिक पृष्ठभूमि: टूटी-फूटी पारिवारिक संरचना, माता-पिता की उपेक्षा, या सामाजिक बहिष्कार बच्चों में आक्रामकता को जन्म दे सकता है।
- अनुशासन की कमी: स्कूलों में बुलिंग, झगड़ों, और अनुशासनहीन व्यवहार को नजरअंदाज करना हिंसक प्रवृत्तियों को बढ़ावा देता है।
- मनोवैज्ञानिक विकार: कुछ मामलों में, बच्चों में असामाजिक व्यक्तित्व विकार (Antisocial Personality Disorder) या भावनात्मक संवेदनशीलता की कमी हो सकती है, जिसके कारण वे अपने कार्यों के परिणामों को समझ नहीं पाते।
