💥 मौत का मंजर… और एक चमत्कार!
12 जून को हुए एअर इंडिया फ्लाइट AI-171 के भीषण हादसे में जब 241 लोग मौत के मुंह में समा गए, तब एक नाम सामने आया – रमेश विश्वास कुमार। वह इस भयानक विमान हादसे से जिंदा बचने वाले इकलौते यात्री हैं। रमेश इस वक्त अहमदाबाद सिविल अस्पताल में भर्ती हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनसे मुलाकात कर चुके हैं।

🔎 कैसे बचे रमेश?
रमेश विश्वास ने DD न्यूज़ से बातचीत में अपनी आपबीती साझा की और बताया कि वो कैसे मौत के जबड़े से वापस लौटे।
“जैसे ही प्लेन गिरा, मेरी तरफ का दरवाजा टूट गया। मैं सीटबेल्ट खोलकर बाहर भाग गया…”
- रमेश प्लेन की 11A सीट पर बैठे थे।
- उनका कहना है, हादसे के बाद उन्हें कुछ देर के लिए लगा कि वो मर गए हैं।
- जब होश आया, तो देखा कि वो ज़िंदा हैं।
- दरवाजा टूटने और सामने खाली जगह दिखने के बाद उन्होंने बाहर निकलने की कोशिश की और निकल भी आए।
#WATCH | Prime Minister Narendra Modi meets the lone survivor of yesterday’s #AirIndiaPlaneCrash.
241 of 242 who were onboard the plane lost their lives.
(Source – DD) pic.twitter.com/tVXoscmOPE
— ANI (@ANI) June 13, 2025
🎙 रमेश की आंखों देखी:
| 🧾 | प्रश्न | उत्तर |
|---|---|---|
| 🛩️ | हादसा कैसे हुआ? | टेक ऑफ के कुछ सेकंड बाद ही झटका लगा, फिर लाइट जली और धमाका हुआ। |
| 🔥 | आप कैसे बचे? | दरवाजा टूट गया, सीट समेत नीचे गिरा, वहां से बाहर निकला। |
| 👀 | सामने क्या दिखा? | दो एयर होस्टेस, एक अंकल-आंटी और कई लोग आग में जलते दिखे। |
| 🚶 | क्या पैदल बाहर निकले? | हां, हादसे की जगह से खुद चलकर बाहर आया। |
🏥 PM मोदी ने की मुलाकात
प्रधानमंत्री मोदी 13 जून की सुबह अहमदाबाद पहुंचे और सबसे पहले घटनास्थल का दौरा किया। इसके बाद वे सिविल अस्पताल पहुंचे जहां उन्होंने रमेश विश्वास से करीब 5 मिनट बातचीत की। PM ने पूछा कि हादसा कैसे हुआ और उनका हालचाल जाना।

🛫 फ्लाइट AI-171: हादसे की भयावहता
- विमान: बोइंग 787 ड्रीमलाइनर
- उड़ान: अहमदाबाद से लंदन
- समय: 12 जून दोपहर 1:38 बजे टेक ऑफ, दो मिनट बाद क्रैश
- यात्री: 230 पैसेंजर + 12 क्रू = कुल 242 लोग
- मृतक: 241
- जिंदा बचे: सिर्फ 1 रमेश विश्वास कुमार
🏢 मेडिकल हॉस्टल बना मौत का अड्डा
प्लेन अहमदाबाद सिविल हॉस्पिटल के हॉस्टल पर गिरा।
- हादसे के वक्त 50-60 डॉक्टर्स और स्टाफ इमारत में मौजूद थे।
- कम से कम 15 लोग घायल, कई बुरी तरह झुलसे।
- रमेश ने बताया कि शायद वे बिल्डिंग के निचले हिस्से से टकराए, तभी बच गए।
रमेश विश्वास की यह कहानी सिर्फ एक हादसे की नहीं, बल्कि चमत्कार, हिम्मत और इंसानी जिजीविषा की मिसाल है।
जब 241 लोग कुछ ही पलों में जिंदगी हार बैठे, रमेश की किस्मत ने उन्हें दूसरा जन्म दे दिया। यह कहानी अब सिर्फ एक सर्वाइवर की नहीं, बल्कि हवा में उड़ते एक विश्वास की है – कि ज़िंदगी किसी भी मोड़ पर हमें चौंका सकती है।
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