सीएम योगी का श्रद्धांजलि संदेश
Ahilyabai Holkar Jayanti: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर की जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उन्हें “सेवा, धर्मनिष्ठा, न्यायप्रियता और लोक-कल्याण की प्रतीक” बताया। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि अहिल्याबाई का जीवन महिला सशक्तिकरण, सामाजिक उत्थान और सांस्कृतिक पुनरुत्थान का प्रकाश स्तंभ है, जो हमें युगों तक प्रेरणा देता रहेगा।
जीवन परिचय और पारिवारिक पृष्ठभूमि
अहिल्याबाई होल्कर का जन्म 31 मई 1725 को महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के चांडी गांव में हुआ था। उनके पिता मनकोजी राव शिंदे मराठा सेना में सैनिक थे, जबकि माता सुशीला बाई एक सामान्य किसान परिवार से थीं। अहिल्याबाई में प्रारंभ से ही गहरी सामाजिक संवेदना और नेतृत्व की क्षमता थी।
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महिलाओं के अधिकारों के लिए क्रांतिकारी कदम
अहिल्याबाई ने उस दौर में महिलाओं के अधिकारों के लिए कई साहसिक फैसले लिए। उन्होंने उस नियम को बदला जिसके तहत पति या पुत्र की मृत्यु के बाद महिला संपत्ति की उत्तराधिकारी नहीं मानी जाती थी। उन्होंने मां और पत्नी को संपत्ति पर अधिकार दिलाया, जो अपने समय में क्रांतिकारी सुधार था।
सांस्कृतिक जागरण की प्रेरणास्त्रोत
अहिल्याबाई केवल इंदौर की शासक नहीं थीं, बल्कि भारतभर में सांस्कृतिक जागरण की ध्वजवाहक रहीं। उन्होंने देश के सैकड़ों तीर्थस्थलों पर मंदिर, धर्मशालाएं, अन्नक्षेत्र और विद्यालयों का निर्माण कराया। बनारस में अन्नपूर्णा मंदिर, गया में विष्णु मंदिर, सोमनाथ, अयोध्या, मथुरा, द्वारका, रामेश्वर जैसे पवित्र स्थलों पर भी उन्होंने निर्माण कार्य कराए।
कल्याणकारी शासन और सामाजिक सेवा
Ahilyabai Holkar Jayanti: अहिल्याबाई का शासन समर्पण और करुणा का उदाहरण रहा। उन्होंने विधवाओं, अनाथों और दिव्यांगों के लिए आश्रम बनवाए। अपने पति खांडेराव और ससुर मल्हारराव की स्मृति में कई जनसेवा केंद्र स्थापित किए। 13 अगस्त 1795 को उन्होंने अपने जीवन की अंतिम सांस ली, लेकिन उनका योगदान आज भी अमर है।
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