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अमेरिका जैसा बंकर बस्टर बनाएगा भारत: अग्नि-5 मिसाइल का शक्तिशाली वर्जन तैयार

Shital Sharma July 1, 2025

agni 5 bunker buster india vs gbu57 drdo news: बंकरों को 100 मीटर गहराई तक करेगा तबाह अग्नि-5 का नया अवतार

 agni 5 bunker buster india vs gbu57 drdo news: भारत अब रक्षा तकनीक के उस मुकाम की ओर बढ़ रहा है, जहां वह दुनिया की सबसे शक्तिशाली मिलिट्री टेक्नोलॉजी—अमेरिका के GBU-57 बंकर बस्टर बम—को टक्कर देने के लिए तैयार है। DRDO (Defence Research and Development Organisation) अग्नि-5 इंटर कॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल के दो नए वर्जन पर काम कर रहा है, जो 80 से 100 मीटर गहराई तक ज़मीन के भीतर जाकर दुश्मन के बंकर, न्यूक्लियर साइट, कंट्रोल रूम और हथियार भंडार को नेस्तनाबूद कर देंगे।

कितना ताकतवर होगा नया अग्नि-5?

अग्नि-5 के मौजूदा वर्जन की रेंज 5000 किलोमीटर तक है और यह परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है। लेकिन नए वर्जन की ताकत भले ही रेंज के लिहाज से थोड़ी कम होगी (2500 किलोमीटर), पर ये मिसाइलें 7500 किलो विस्फोटक ले जाने में सक्षम होंगी। अमेरिका के GBU-57 बम का वॉरहेड 2600 किलो का है, जबकि अग्नि-5 का यह वर्जन उसे तीन गुना टक्कर देगा।

कौन-से वर्जन बन रहे हैं?

DRDO दो तरह के वर्जन बना रहा है—

  1. एयरबर्स्ट वॉरहेड: यह मिसाइल टारगेट के ऊपर फटकर बड़े इलाके में तबाही फैलाएगी।

  2. पैठ-मारक बंकर बस्टर: यह मिसाइल जमीन में घुसकर दुश्मन के ठिकानों को भीतर से खत्म करेगी, भले वो कंक्रीट बंकर ही क्यों न हो।

अमेरिका का GBU-57: जिसकी बराबरी करेगा भारत

21 जून 2024 को अमेरिका ने ईरान की फोर्डो न्यूक्लियर साइट पर पहली बार GBU-57 बम का उपयोग किया, जो 200 फीट नीचे स्थित थी। इस बम को विकसित करने में अमेरिका को 15 साल लगे। इसका वजन 30,000 पाउंड (करीब 13,600 किलो) है। अब भारत भी इसी लीग में शामिल होने जा रहा है।

क्यों जरूरी है भारत के लिए बंकर बस्टर मिसाइल?

ऑपरेशन सिंदूर के बाद मिला सबक

भारत ने पाकिस्तान और चीन की सीमाओं पर बंकर-तोड़ हमलों की ज़रूरत को महसूस किया है। दोनों देशों ने अपने न्यूक्लियर और मिलिट्री बेस को जमीन के भीतर गहराई में बना रखा है, जिससे उन पर पारंपरिक मिसाइलें असर नहीं कर पातीं। अग्नि-5 का नया वर्जन इन सीमितियों को तोड़ेगा।

हाई एल्टीट्यूड और पहाड़ी इलाकों में प्रभावी

पाकिस्तान और चीन के हिमालयी क्षेत्रों में मौजूद कमांड सेंटर और हथियार डिपो को नष्ट करने के लिए इन मिसाइलों का इस्तेमाल बेहद कारगर होगा। यह भारत की सामरिक शक्ति को नए स्तर पर ले जाएगा।

स्पेस में भी होगा भारत का वर्चस्व

भारत अब सिर्फ जमीन पर नहीं, अंतरिक्ष में भी अपनी सैन्य ताकत को मजबूत कर रहा है। अगले 4 सालों में सरकार 52 स्पेशल डिफेंस सैटेलाइट लॉन्च करने जा रही है, जो AI आधारित होंगे और 36,000 किलोमीटर ऊंचाई से पाकिस्तान और चीन की सीमाओं पर नजर रखेंगे।

इस मिशन के लिए 26,968 करोड़ रुपये का बजट तय किया गया है। इस मिशन को ‘स्पेस बेस्ड सर्विलांस फेज-3’ (SBS-3) नाम दिया गया है।

ISRO की मदद से आतंकी ठिकानों पर सटीक वार

भारत की स्पेस एजेंसी ISRO की मदद से भारतीय सेनाएं अब पाकिस्तान के आतंकी अड्डों और ड्रोन बेस को पहचान कर सटीक निशाना बना रही हैं। ये सैटेलाइट्स भारतीय मिसाइल सिस्टम और वॉर प्लानिंग को और भी धारदार बना रहे हैं।

भारत अब सिर्फ रक्षा नहीं, आक्रामक जवाब देने के लिए भी तैयार हो रहा है। DRDO की अग्नि-5 मिसाइल के नए बंकर बस्टर वर्जन और स्पेस डिफेंस सैटेलाइट्स मिलकर भारत को अगली पीढ़ी की सैन्य शक्ति में बदलने जा रहे हैं। ये तकनीक सिर्फ सुरक्षा नहीं, बल्कि शक्ति का संदेश है—दुश्मन देश अब सिर्फ सतह से नहीं, धरती की गहराई से भी निशाने पर होंगे।

Read More :- ऑपरेशन सिंदूर: भारतीय अफसर बोले- हमारे विमान तबाह हुए

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