रिपोर्ट – धीरप हाडा
Agar Malwa जिले में आज भैरव अष्टमी के चलते जिला मुख्यालय पर स्थित प्रसिद्ध केवड़ा स्वामी मन्दिर में दर्शन के लिये सुबह से ही स्थानीय सहित दूर दराज से आए भक्तो का तांता लगा रहा। इस अवसर पर देर शाम काल भैरव की विशेष पूजा अर्चना कर 56 भोग का प्रसाद चढ़ाया गया। साथ ही इस प्रसिद्ध मन्दिर को फूल मालाओं व विधुत से आकर्षक रूप से सजाया गया। काल भैरव अष्टमी जिसे कालाष्टमी भी कहते हैं, इस दिन इनका प्राकट्य हुआ था, इसीलिए इस दिन इनकी विधि-विधान से पूजा की जाती है। माना जाता है कि इस मंदिर में स्थित काल भैरव अपने भक्तों पर सदैव कृपा बनाए रखते हैं और इनकी पूजा करने से घर से नकारात्मक शक्तियां भी दूर हो जाती है। साथ ही काल भैरव की पूजा से शत्रुओं पर भी विजय प्राप्त होती है।
केवड़ा स्वामी के नाम से प्रसिद्ध इस मंदिर में भैरव बाबा की प्रतिमा को जंजीरो से बांध कर रखा गया है। कहा जाता है कि भैरव बाबा अपने मंदिर को छोड़कर बच्चो के साथ खेलने चले जाया करते थे। और जब उनका मन खेलने से भर जाता तो वे बच्चो को उठा कर समीप स्थित तालाब में फेंक देते थे।इसी कारण केवड़ा स्वामी के भैरव नाथ को जंजीरो से बांध दिया गया। तथा उन्हें रोकने हेतु उनके आगे एक खम्बा भी लगा दिया है। ताकि भगवान उत्पात ना मचाए लोगों को परेशान ना करें।
इस मंदिर का इतिहास भी पुराना है यहां की मान्यता है कि सन् 1424 में केवड़ा स्वामी मंदिर बनने से पहले झाला राजपूत परिवार के कुछ लोग अपने भैरव को गुजरात से लेकर जा रहे थे रत्नसागर तालाब किनारे यहीं से गुजरने पर उनका चक्का थम गया और परिणाम यह हुए की भैरव महाराज यहीं बस गएा माना जाता है की झाला वंश के राजा राघव देव ने इस प्रतिमा की स्थापना की थी। यह झाला राजपूत समाज के कुलदेव भी है ।
