Rajpal Yadav Gets Bail: बॉलीवुड के जाने–माने एक्टर राजपाल यादव चेक बाउंस केस में तिहाड़ जेल में बंद थे, लेकिन हाईकोर्ट में 16 फरवरी सोमवार को एक्टर राजपाल यादव की अंतरिम जमानत याचिका पर सुनवाई की गई। इस दौरान भुगतान के तरीके को लेकर काफी बहस हुई। हालांकि निर्धारित समय पर तय समय पर बचे शेष 1.5 करोड़ रुपए का डिमांड ड्रॉफ्ट जमा कराया गया, जिसके बाद एक्टर को अंतरिम जमानत दी गई।
भुगतान के तरीके को लेकर हुई बहस
सुनवाई के दौरान एक्टर के वकील ने अदालत को बताया कि-‘ वे 1.5 करोड़ रुपए की राशि एफडीआर (फिक्स्ड डिपॉजिट रसीद) के जरिए जमा करने को तैयार हैं।’ लेकिन जस्टिस शर्मा ने यह साफ कर दिया था कि यह राशि FDR के बजाय डिमांड ड्राफ्ट (डीडी) के माध्यम से ही स्वीकार की जाएगी। अदालत ने किसी भी वैकल्पिक तरीके पर छूट देने से इनकार कर दिया।

पहले जमा की गई राशि और अदालत के निर्देश
कोर्ट ने रिकॉर्ड पर लिया कि 25 लाख रुपए का एक डिमांड ड्राफ्ट पहले ही जमा कर चुके है। इसके अलावा, 75 लाख रुपए का एक और डीडी भी पूर्व में प्रस्तुत किया गया था। न्यायालय ने सुबह हुई सुनवाई के दौरान निर्देश दिया था कि- शेष 1.5 करोड़ रुपए की राशि उसी दिन दोपहर 3 बजे तक डिमांड ड्राफ्ट के रूप में जमा कराई जाए। जस्टिस शर्मा ने दोहराया कि न्यायालय के आदेशों का पालन तय प्रारूप में ही किया जाना चाहिए।
एक्टर को मिली जमानत
अदलात की शर्तों को पूरा करते हुए निर्धारित समय पर तय समय पर बचे शेष 1.5 करोड़ रुपए का डिमांड ड्रॉफ्ट जमा कराया गया, जिसके बाद अदालत ने एक्टर राजपाल यादव को अंतरिम जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया।

जेल में क्यों थे एक्टर
राजपाल यादव फिलहाल दिल्ली की तिहार जेल में बंद हैं। यह मामला 2010 से चला आ रहा है, जब उन्होंने अपनी फिल्म ‘अता पता लापता’ बनाने के लिए प्राइवेट कंपनी मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से 5 करोड़ रुपये का लोन लिया था। फिल्म फ्लॉप हो गई, जिससे उन्हें आर्थिक संकट का सामना करना पड़ा और वे समय पर कर्ज नहीं चुका सके। लोन के समय दिए गए चेक बाउंस हो गए, जिसके बाद कंपनी ने उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई।
दोनों पक्षों के बीच कई बार समझौते हुए, लेकिन पूरी रकम का भुगतान नहीं हो सका। समय के साथ ब्याज जुड़ते जाने से कुल राशि बढ़कर लगभग 9 करोड़ रुपये हो गई। 2018 में दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने उन्हें दोषी करार दिया और छह महीने की सजा सुनाई, जिसमें से उन्होंने तीन महीने जेल में काटे। उसके बाद हाई कोर्ट में अपील की गई, जहां उन्हें कई बार राहत मिली क्योंकि उन्होंने भुगतान करने का वादा किया। हालांकि, बार-बार अदालती निर्देशों का पालन न करने के कारण दिल्ली हाई कोर्ट ने फरवरी 2026 में उन्हें सरेंडर करने का आदेश दिया।
