अफगानिस्तान में सत्ता संभालने के साढ़े तीन साल बाद अब तालिबान सरकार के भीतर दरारें खुलकर सामने आने लगी हैं। हालात इस कदर बिगड़ते दिख रहे हैं कि सरकार के टूटने का खतरा तक जताया जा रहा है। सत्ता संघर्ष अब सिर्फ बंद कमरों की चर्चा नहीं रहा, बल्कि संगठन के शीर्ष नेतृत्व के बीच खुली खींचतान का रूप ले चुका है। BBC की एक विस्तृत रिपोर्ट के मुताबिक, हाल ही में सामने आई एक लीक ऑडियो क्लिप ने तालिबान के भीतर चल रही इस जंग को उजागर कर दिया है। ऑडियो की तारीख सार्वजनिक नहीं की गई, लेकिन इसके कंटेंट ने तालिबान की एकता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
दो धड़ों में बंटा तालिबान नेतृत्व
तालिबान के भीतर इस समय साफ तौर पर दो ताकतवर गुट नजर आते हैं एक गुट का नेतृत्व कर रहे हैं तालिबान के सुप्रीम लीडर हिबतुल्लाह अखुंदजादा दूसरा गुट गृहमंत्री सिराजुद्दीन हक्कानी के इर्द-गिर्द केंद्रित है दोनों के बीच मतभेद सिर्फ सत्ता को लेकर नहीं हैं, बल्कि इस बात पर भी हैं कि अफगानिस्तान को किस दिशा में ले जाया जाए। यह वही तालिबान है जिसने अगस्त 2021 में अमेरिकी सेना की वापसी के बाद काबुल पर कब्जा कर लिया था और दुनिया को यह संदेश दिया था कि संगठन पूरी तरह एकजुट है। अब वही दावा कमजोर पड़ता दिख रहा है।
लीक ऑडियो में क्या बोले अखुंदजादा?
BBC के मुताबिक, वायरल ऑडियो क्लिप में हिबतुल्लाह अखुंदजादा खुद स्वीकार करते नजर आते हैं कि सरकार के भीतर लोग आपस में टकरा रहे हैं। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि
अगर ये अंदरूनी मतभेद बढ़ते रहे, तो इस्लामिक अमीरात ढह जाएगा और खत्म हो जाएगा
यह भाषण जनवरी 2025 में दक्षिणी शहर कंधार के एक मदरसे में तालिबान लड़ाकों को संबोधित करते हुए दिया गया था। इस बयान ने उन अटकलों को और मजबूत कर दिया, जो महीनों से चल रही थीं कि तालिबान की टॉप लीडरशिप में गंभीर मतभेद हैं। दिलचस्प बात यह है कि तालिबान अब तक इन खबरों को लगातार खारिज करता रहा है।

कंधार बनाम काबुल: सोच की टक्कर
कंधार गुट (अखुंदजादा)
पूरी तरह अखुंदजादा के प्रति वफादार है दक्षिणी शहर कंधार से संचालन होता है दुनिया से दूरी बनाकर चलने की सोच अफगानिस्तान को एक सख्त इस्लामिक अमीरात के रूप में बनाए रखने की इच्छा है महिलाओं और लड़कियों पर कठोर प्रतिबंध।
काबुल गुट (हक्कानी)
सिराजुद्दीन हक्कानी के नेतृत्व में राजधानी काबुल में सक्रिय है इस्लाम की सख्त व्याख्या तो मानता है, लेकिन दुनिया से संवाद चाहता है अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के पक्ष में और लड़कियों और महिलाओं को कम से कम बुनियादी शिक्षा देने का समर्थन फिलहाल अफगानिस्तान में प्राथमिक स्तर के बाद लड़कियों की शिक्षा पर रोक लगी हुई है, जिसे लेकर हक्कानी गुट असहज माना जा रहा है।
रहस्यमय सुप्रीम लीडर
हिबतुल्लाह अखुंदजादा अब भी एक रहस्यमय चेहरा बने हुए हैं। अब तक उनकी सिर्फ दो तस्वीरें ही सार्वजनिक रूप से मौजूद हैं, जिससे उनकी पकड़ और सत्ता की शैली और भी अपारदर्शी नजर आती है।
इंटरनेट बैन से बढ़ा टकराव
BBC रिपोर्ट के मुताबिक, हाल के महीनों में लगाए गए इंटरनेट प्रतिबंधों ने भी इस संघर्ष को हवा दी है। काबुल गुट इसे देश को और अलग-थलग करने वाला कदम मानता है, जबकि कंधार गुट इसे विचारधारात्मक सुरक्षा से जोड़कर देखता है।
