सोते-सोते दबे लोग, मलबे में दफन हुए सपने!

काबुल: अफगानिस्तान में रविवार की आधी रात को 6 तीव्रता का भूकंप आया, जिससे अब तक 800 लोगों की मौत हो चुकी है और 2500 से ज्यादा घायल हुए हैं। ज्यादातर लोग सो रहे थे, जिससे उन्हें बचने का मौका नहीं मिला और वे इमारतों के मलबे में दब गए। कुनार प्रांत सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है, जहां पूरे गांव तबाह हो गए हैं।
आधी रात का भूकंप: सोते-सोते दबे लोग
अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के अनुसार, भूकंप जलालाबाद शहर से 17 मील दूर आया, जो काबुल से 150 किमी दूर है। आधी रात 11:47 बजे आए इस भूकंप के झटके पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा और पंजाब तक महसूस किए गए, जबकि भारत के गुरुग्राम में भी हल्के झटके महसूस हुए।
कुनार प्रांत में सबसे ज्यादा तबाही हुई है, जहां पहाड़ी इलाके और कमजोर मकान (मिट्टी और पत्थरों से बने) भूकंप को झेल नहीं पाए। लैंडस्लाइड के कारण सड़कें बंद हो गई हैं, जिससे बचाव कार्य में दिक्कत हो रही है।
तबाही के दृश्य: मलबे में दबे लोग, कब्र खोदते परिजन
- मलबे में दबकर छोटी बच्ची की मौत हो गई, जिसके शव को गोद में उठाए पिता की तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है।
- घायलों को चारपाई पर ले जाया जा रहा है, क्योंकि एम्बुलेंस की कमी है।
- हेलिकॉप्टर से घायलों को अस्पताल पहुंचाया जा रहा है।
- स्थानीय लोग मलबा हटाने में जुटे हैं, लेकिन पहाड़ी इलाके तक पहुंचना मुश्किल है।
स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता शराफत जमान ने कहा कि मृतकों की संख्या और बढ़ सकती है।
भारत ने दी मदद की पेशकश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अफगानिस्तान को मानवीय सहायता देने की पेशकश की है। उन्होंने ट्वीट किया: इस कठिन घड़ी में हमारी संवेदनाएं और प्रार्थनाएं शोक संतप्त परिवारों के साथ हैं। भारत प्रभावित लोगों को हर संभव मदद देने के लिए तैयार है।
अफगानिस्तान का भूकंप इतिहास
अफगानिस्तान हिंदूकुश पर्वतमाला के करीब है, जो भूकंप के लिहाज से सक्रिय है। 2023 में 4,000 और 2022 में 1,000 लोगों की मौत भूकंप से हुई थी।
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