aayodhya ram mandir on ramnavami : जानिए इस दिव्य प्रक्रिया के बारे में
aayodhya ram mandir on ramnavami : आज रामनवमी के दिन अयोध्या में भगवान रामलला का जन्म हुआ और साथ ही एक ऐतिहासिक और दिव्य घटना भी घटी, जब रामलला के मस्तक पर सूर्य की किरणें पड़ीं। यह सूर्य तिलक समारोह खास रूप से अभिजीत मुहूर्त में हुआ, जब सूर्य की किरणें सीधे रामलला के मस्तक तक पहुंची। इस लेख में हम जानेंगे इस दिव्य प्रक्रिया के बारे में और कैसे यह अनोखी घटना अयोध्या के राम मंदिर में हुई।
रामलला का जन्म और सूर्य तिलक
रामनवमी के दिन सुबह 12 बजे भगवान रामलला का जन्म हुआ। इसके बाद, अभिजीत मुहूर्त में, रामलला के मस्तक पर सूर्य अभिषेक हुआ। यह एक विशेष अवसर था, जब सूर्य की किरणें लगभग चार मिनट तक रामलला के मस्तक पर पड़ीं। इसे सूर्य तिलक कहा गया, जो एक दिव्य और अद्भुत प्रक्रिया के रूप में देखा गया।

रामलला के मस्तक पर सूर्य किरणें पड़ते हुए यह दृश्य अत्यंत भव्य था और यह दृश्य मंदिर परिसर में उपस्थित भक्तों के लिए एक अपूर्व अनुभव था।
सूर्य तिलक की प्रक्रिया
रामलला के मस्तक पर सूर्य किरणें पहुंचाने के लिए एक विशेष तकनीकी व्यवस्था की गई थी। इसके लिए अष्टधातु के पाइप से एक सिस्टम तैयार किया गया। इस प्रणाली में 4 लेंस और 4 मिरर का इस्तेमाल किया गया, ताकि सूर्य की किरणें ठीक से रामलला के मस्तक तक पहुंच सकें। यह प्रणाली इतनी प्रभावी थी कि सूर्य की किरणें गर्भगृह तक पहुंचने के बाद रामलला के मस्तक पर सही समय पर पड़ सकीं।
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सूर्य तिलक से पहले रामलला के पट कुछ देर के लिए बंद कर दिए गए थे और गर्भगृह की लाइट भी बंद कर दी गई थी, ताकि सूर्य किरणों का प्रभाव पूरी तरह से महसूस हो सके।
रामलला के सूर्य तिलक का महत्व
यह सूर्य तिलक न केवल आध्यात्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण था, बल्कि यह अयोध्या के राम मंदिर की अद्भुत वास्तुकला और धार्मिक परंपराओं को भी प्रदर्शित करता है। सूर्य तिलक एक विशेष आध्यात्मिक प्रक्रिया है, जो धार्मिक अनुष्ठानों में सूर्योदय के समय सूर्य की महत्वता को दर्शाता है।

यह प्रक्रिया यह भी सिद्ध करती है कि प्रकृति और आध्यात्मिकता का एक गहरा संबंध है, जहां सूर्य की किरणें भगवान के मस्तक तक पहुंचती हैं और उन्हें आशीर्वाद प्रदान करती हैं। यह एक दिव्य संकेत है जो दर्शाता है कि भगवान राम के साथ सूर्य का भी विशेष संबंध है।
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रामनवमी के दिन अयोध्या के राम मंदिर में रामलला के सूर्य तिलक ने एक अद्वितीय और अद्भुत आध्यात्मिक अनुभव प्रदान किया। सूर्य की किरणों ने न केवल रामलला के मस्तक को आलोकित किया, बल्कि यह घटना धार्मिक दृष्टिकोण से भी अत्यंत महत्वपूर्ण मानी गई। इस प्रकार के दिव्य अनुष्ठान भारतीय संस्कृति और धार्मिक परंपराओं की महानता को दर्शाते हैं।
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