haryana 80 year old woman skydiving: 230 किमी/घंटा की रफ्तार से बनाई स्काई डाइविंग का रिकॉर्ड
haryana 80 year old woman skydiving: हरियाणा के नारनौल में डॉ. श्रद्धा चौहान ने 80वें जन्मदिन पर ऐसा रिकॉर्ड बनाया जो हर किसी को प्रेरित कर रहा है। संस्कृत की रिटायर्ड प्रोफेसर ने अपने बेटे की मदद से 10 हजार फीट की ऊंचाई से 230 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से स्काई डाइविंग की। वो देश की सबसे उम्रदराज महिला स्काई डाइवर बन गई हैं।
बेटे ने पूरा किया मां का सपना
डॉ. चौहान के बेटे सौरभ सिंह शेखावत, जो भारतीय सेना से ब्रिगेडियर पद से रिटायर हैं, ने मां के उस सपने को पूरा किया जो उन्होंने एक साल पहले जाहिर किया था।

जब सौरभ नारनौल के स्काई हाई इंडिया स्काईडाइविंग स्कूल में मेंटर और चीफ इंस्ट्रक्टर बने, तब उनकी मां ने आसमान में उड़ने की इच्छा जताई थी।
1 जुलाई को मां को दिया जन्मदिन का तोहफा
सौरभ ने इस यादगार पल को मां के 80वें जन्मदिन (1 जुलाई) पर सच करने का निर्णय लिया।
वे मां को राजस्थान के कोटपुतली-बहरोड़ जिले के गांव ढाणी दौलत सिंह से नारनौल लाए और स्काईडाइविंग स्कूल दिखाया।
फिर विशेष सुरक्षा प्रबंधों और मेडिकल जांच के बाद उन्हें डाइविंग के लिए तैयार किया गया।
छलांग का रोमांच: बिना डरे लगाई 10,000 फीट से जंप
सभी सेफ्टी उपकरणों और दिशा-निर्देशों के साथ तैयार होकर डॉ. श्रद्धा ने बेटे के साथ प्लेन में चढ़ाई की।
जब विमान 10 हजार फीट की ऊंचाई पर पहुंचा, तब उन्होंने बिना किसी डर के छलांग लगाई।
गति थी 230 किलोमीटर प्रति घंटा, लेकिन प्रोफेसर साहिबा न डरीं, न रुकीं — और इस साहसिक उपलब्धि के साथ इतिहास रच डाला।
कौन हैं डॉ. श्रद्धा चौहान?
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संस्कृत की प्रोफेसर रहीं
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जोधपुर से रिटायर
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गांव की पूर्व सरपंच
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सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस और स्पाइनल डिस्क की मरीज, फिर भी उड़ान में कोई डर नहीं
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80 वर्ष की उम्र में भी स्वस्थ और सक्रिय जीवन शैली
बेटे की भावुक प्रतिक्रिया

सौरभ ने कहा:
“माता-पिता ही हमारी दुनिया होते हैं। उन्होंने जीवनभर हमारी खुशियों के लिए सब कुछ किया, अब हमारी बारी है उन्हें खास महसूस कराने की।”
वीडियो हुआ वायरल: 1 लाख से ज्यादा व्यूज़
स्काईहाई इंडिया ने इस स्काई डाइविंग का वीडियो अपने इंस्टाग्राम पर शेयर किया।
अब तक इस वीडियो को 1 लाख से ज्यादा लोग देख चुके हैं।
जैसे ही डॉ. चौहान लैंड करती हैं, वहां मौजूद लोग तालियों और बधाईयों के साथ उनका स्वागत करते हैं।
उम्र नहीं, हौसला मायने रखता है

डॉ. श्रद्धा चौहान का यह साहसिक कदम एक गहरा संदेश देता है कि अगर दिल में जुनून हो, तो कोई भी सपना अधूरा नहीं रहता, चाहे उम्र कुछ भी हो।
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