commonwealth speakers conference: भारत की संसद 14-16 जनवरी 2026 तक 28वें राष्ट्रमंडल स्पीकर्स और पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन (CSPOC) की मेजबानी करने के लिए पूरी तरह तैयार है। यह तीन दिवसीय सम्मेलन लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला की अध्यक्षता में संसद भवन परिसर, नई दिल्ली में आयोजित होगा और अब तक के इतिहास में सबसे बड़ी भागीदारी दर्ज होने की संभावना है. पीएम नरेंद्र मोदी 15 जनवरी को प्रातः 10:30 बजे उद्घाटन समारोह करेंगे और कीनोट भाषण देंगे। इसके बाद प्रधानमंत्री अनौपचारिक संवाद और सामूहिक फोटो सत्र में शामिल होंगे।
commonwealth speakers conference: CSPOC का इतिहास
CSPOC की शुरुआत 1969 में कनाडा के हाउस ऑफ कॉमन्स स्पीकर लुसिएन लैमूरू की पहल पर हुई थी। यह सम्मेलन राष्ट्रमंडल के 56 सदस्य देशों के संसदों के स्पीकर और पीठासीन अधिकारियों के लिए स्वतंत्र मंच प्रदान करता है। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य है, संसदों में निष्पक्षता और न्यायसंगतता को मजबूत करना, संसदीय लोकतंत्र की विविधताओं को समझना, संसदीय संस्थाओं का विकास करना.यह सम्मेलन हर दो वर्ष में जनवरी के प्रारंभ में आयोजित होता है, जबकि बीच के वर्षों में स्थायी समिति की बैठक होती है।
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commonwealth speakers conference: भारत की भूमिका और कार्यक्रम
भारत ने इससे पहले यह सम्मेलन 1971, 1986 और 2010 में आयोजित किया है। इस बार भारत में होने वाला CSPOC तकनीकी और लोकतांत्रिक नवाचारों पर भी फोकस करेगा. 14 जनवरी: स्थायी समिति की बैठक, लाल किले का भ्रमण, लाइट एंड साउंड शो, रात्रिभोज, 15 जनवरी: उद्घाटन समारोह, पूर्ण अधिवेशन, कार्यशालाएं,संसद में एआई का प्रयोग: नवाचार और निगरानी, सोशल मीडिया और सांसदों पर इसका प्रभाव, सांस्कृतिक कार्यक्रम और राजकीय भोज. 16 जनवरी की कार्यशालाएं में संसद के प्रति जनता की समझ और नागरिक भागीदारी रहेगी, संसद सदस्यों एवं कर्मियों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और कल्याण पर चर्चा, 17-18 जनवरी को प्रतिनिधियों के लिए जयपुर भ्रमण भी आयोजित होगा
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पाकिस्तान और बांग्लादेश प्रतिनिधित्व नहीं करेंगे
42 राष्ट्रमंडल देशों ने भागीदारी की पुष्टि की है, कुल 61 स्पीकर/प्रेसिडिंग ऑफिसर और 229 प्रतिनिधियों की उम्मीद, विशेष अतिथि अंतर-संसदीय संघ की अध्यक्ष डॉ. तुलिया ऐक्सन, राष्ट्रमंडल संसदीय संघ के चेयरपर्सन डॉ. क्रिस्टोफर कलिला रहेगे
लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि यह अब तक का सबसे बड़ा CSPOC होगा और सभी समन्वय विशेष ऐप के माध्यम से डिजिटल रूप से किए जाएंगे, जिससे कागज का उपयोग नहीं होगा।
