राजधानी भोपाल में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था गंभीर संकट से गुजर रही है। शहर के 19 प्रमुख मार्गों से करीब 250 सिटी बसें पूरी तरह हट चुकी हैं। पहले जहां 25 रूटों पर 368 बसें संचालित हो रही थीं, वहीं अब केवल 7 रूटों पर 70 से 90 बसें ही चल रही हैं.इस स्थिति से रोजाना करीब एक लाख से अधिक यात्री प्रभावित हो रहे हैं। इनमें महिलाएं, छात्र और नौकरीपेशा लोग सबसे ज्यादा परेशान हैं। बसों की कमी के कारण लोगों को महंगे किराए पर निजी वाहनों या ऑटो का सहारा लेना पड़ रहा है।
इन कारणों से ठप हुआ बस संचालन
बस संचालन में गिरावट के पीछे कई प्रमुख कारण सामने आए हैं। इनमें टिकट कलेक्शन को लेकर विवाद, किराया बढ़ोतरी, देरी पर लगने वाली पेनल्टी, हाईकोर्ट में लंबित मामले और शहर में मेट्रो निर्माण के चलते सड़कों का बंद होना शामिल है। इन वजहों से बस ऑपरेटरों और प्रशासन के बीच मतभेद बढ़े, जिसके बाद कई रूटों पर संचालन बंद कर दिया गया।
सिर्फ 7 रूटों पर बची बस सेवा
फिलहाल शहर में सीमित रूटों पर ही बसें चल रही हैं। इनमें नेहरू नगर- कृष्णा हाइट्स, करोंद-बैरागढ़, चिरायु-अवधपुरी, गांधी नगर-वर्धमान सिटी, कोलार-करोंद और रातीबढ़-ट्रांसपोर्ट नगर जैसे रूट शामिल हैं। बाकी प्रमुख रूटों पर बस सेवा पूरी तरह बंद हो चुकी है।
अप्रैल से 100 ई-बसें शुरू करने की तैयारी
बीसीसीएल के अधिकारियों के अनुसार, शहर में सार्वजनिक परिवहन सुधारने के लिए अप्रैल 2026 से 100 नई ई-बसें शुरू की जाएंगी। इन बसों के संचालन के लिए टेंडर प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी।
विधानसभा तक पहुंचा मामला
सिटी बस संचालन का मुद्दा विधानसभा में भी उठ चुका है। इस दौरान व्यवस्थागत खामियों और कथित अनियमितताओं की जांच कराने की बात कही गई थी। नगरीय प्रशासन विभाग ने भी इस पर कार्रवाई का आश्वासन दिया है. फिलहाल, यात्रियों को नई ई-बसों के शुरू होने का इंतजार है, जिससे शहर की परिवहन व्यवस्था में कुछ सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।
