नकली चांदी पर लगाम और आपके फायदे के बारे में जानें
क्या आपने कभी चांदी की ज्वेलरी खरीदी है और सोचा है, “क्या यह असली चांदी है?” अब, 1 सितंबर 2025 से, आपके इस सवाल का जवाब आसान हो जाएगा। सोने के आभूषणों के लिए पहले से लागू हॉलमार्किंग की तरह, अब चांदी की ज्वेलरी पर भी हॉलमार्किंग अनिवार्य हो रही है। हालांकि, शुरुआत में यह स्वैच्छिक (वॉलंटरी) है, लेकिन यह कदम हमारे लिए क्यों महत्वपूर्ण है, आइए जानते हैं।

हॉलमार्किंग क्या है और क्यों यह जरूरी है?
हॉलमार्किंग दरअसल एक सरकारी प्रमाण पत्र होता है जो यह बताता है कि आपकी चांदी या सोने की ज्वेलरी कितनी शुद्ध है। अगर आपने कभी सोने की ज्वेलरी खरीदी है, तो आपने देखा होगा कि सोने पर कैरेट जैसे 22 कैरेट या 18 कैरेट का हॉलमार्क होता है। अब, चांदी पर भी एक खास निशान होगा, जो यह बतायेगा कि उसमें कितनी शुद्धता है।
भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) यह सुनिश्चित करता है कि सभी ज्वेलरी इसके मानकों के अनुसार हो। इसका मतलब यह है कि जब आप चांदी की ज्वेलरी खरीदेंगे और उस पर हॉलमार्क मिलेगा, तो आपको शुद्धता का गारंटी मिलती है।
1 सितंबर से यह बदलाव कैसे काम करेगा?
1 सितंबर 2025 से चांदी की ज्वेलरी पर हॉलमार्किंग लागू होने जा रही है। शुरुआत में यह स्वैच्छिक (वॉलंटरी) रूप से होगा, यानी ज्वैलर्स इसे अपनी मर्जी से अपनाएंगे। लेकिन आने वाले समय में इसे अनिवार्य किया जा सकता है, जैसा कि पहले सोने के लिए हुआ था।
इससे हमें क्या फायदा होगा? चलिए इसे विस्तार से समझते हैं।
सिल्वर हॉलमार्किंग से आपको कैसे फायदा होगा?
- शुद्धता की गारंटी:
हॉलमार्किंग से यह तय होगा कि आपको जो चांदी मिल रही है, वह असली है। अब दुकानदार आपको मिलावटी चांदी नहीं बेच सकेगा। क्या आपने कभी सस्ती चांदी खरीदने के बाद महसूस किया है कि वह उम्मीद से अलग है? हॉलमार्किंग यह सुनिश्चित करेगा कि अब आप धोखा नहीं खाएंगे। - बिक्री में आसानी:
जब आप बाद में अपनी चांदी की ज्वेलरी को बेचना चाहें, तो हॉलमार्क वाली ज्वेलरी अधिक विश्वसनीय मानी जाएगी। यह आपको सही कीमत दिलाने में मदद करेगी। - भरोसा बढ़ेगा:
हॉलमार्किंग से ज्वेलरी पर भरोसा बढ़ेगा। जब हम सोने या चांदी का आभूषण खरीदते हैं, तो एक डर सा होता है कि कहीं धोखा न हो जाए। अब आपको वह डर नहीं होगा। - धोखाधड़ी से सुरक्षा:
कई बार सस्ती चांदी में दूसरी धातुएं मिला दी जाती हैं। हॉलमार्किंग से यह धोखाधड़ी रुक जाएगी। अब जो भी चांदी की ज्वेलरी आप खरीदेंगे, उसमें यह सुनिश्चित होगा कि वह असली चांदी है।
चांदी की ज्वेलरी पर हॉलमार्किंग कैसे काम करती है?
चांदी की ज्वेलरी पर हॉलमार्क लगाने का तरीका बहुत सिंपल है। यह एक 6 अंकों का यूनीक कोड (HUID) होगा, जो बताता है कि ज्वेलरी को BIS के मानकों के हिसाब से चेक किया गया है। इसके अलावा, चांदी के लिए 6 ग्रेड होंगे:
- 800
- 835
- 900
- 925
- 970
- 990
इन ग्रेड्स के जरिए आपको यह जानकारी मिलेगी कि चांदी की शुद्धता कितनी है। यानी, आपको पता चलेगा कि आपने जो चांदी खरीदी है, वह कितनी सही और प्यूरी है।
क्या पुरानी चांदी की ज्वेलरी पर भी हॉलमार्किंग होगी?
अगर आपके पास पुरानी चांदी की ज्वेलरी है, तो उस पर हॉलमार्किंग लागू नहीं होगी। हालांकि, आप अपनी पुरानी चांदी की ज्वेलरी को BIS सेंटर्स पर ले जाकर चेक करवा सकते हैं और हॉलमार्क भी करवा सकते हैं, लेकिन यह पूरी तरह से आपकी मर्जी पर निर्भर करेगा।
हमें क्या करना चाहिए?
बहुत आसान! जब भी आप 1 सितंबर के बाद चांदी की ज्वेलरी खरीदें, तो हॉलमार्क का निशान जरूर चेक करें। अगर दुकानदार कहे कि हॉलमार्क नहीं है, तो उनसे ज्वेलरी की शुद्धता का प्रमाण मांगें। यह आपको न सिर्फ सुरक्षा देगा, बल्कि आपके विश्वास को भी बढ़ाएगा।

इस बदलाव का असली असर क्या है?
इस बदलाव का असर हमारे विश्वास और बाजार की पारदर्शिता पर सीधा पड़ेगा। अब जब हम चांदी की ज्वेलरी खरीदेंगे, तो हमें यह सुनिश्चित करने का अवसर मिलेगा कि वह शुद्ध और असली है। यह न सिर्फ ग्राहकों के लिए एक सुरक्षा कवच है, बल्कि यह उन दुकानदारों के लिए भी एक अच्छे कदम के रूप में उभरेगा, जो बेईमानी से काम नहीं करते।

