खिलखेत दुर्गा मंदिर तोड़े जाने पर हिंदू समुदाय सड़कों पर, रथयात्रा में भारी विरोध
ढाका के खिलखेत में रेलवे की जमीन पर बनाए गए दुर्गा मंदिर पर 26 जून को बुलडोजर चलाए जाने के खिलाफ आज बांग्लादेश बंद का (hartal) आह्वान किया गया है। यह घटना रथयात्रा से ठीक पहले हुई और घटना ने देशभर में गहरा विवाद खड़ा कर दिया।
📌 प्रमुख विरोध स्थल
- ढाका में शाहबाग समेत कई इलाकों में प्रदर्शन हुए,
- कई विश्वविद्यालयों में छात्रों ने मानव श्रृंखला और नारेबाजी की,
- रथयात्रा निकली तो कई शहरों में भव्य विरोध रैली देखने को मिली।
विरोध की वजह: “मंदिर तोड़ा गया, मस्जिद नहीं”
- हिंदू–बौद्ध–ईसाई एकता परिषद और हिंदू महासंघ ने कहा कि यह कार्रवाई धार्मिक अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने वाली है।
- पूर्व अध्यक्ष गोबिंद चंद्र प्रामाणिक ने कहा, “जहां मंदिर गिराया गया, वहां मस्जिदें और मदरसे हैं… मंदिर को अवैध कहकर गिराना कट्टरपंथ का परिचायक है।”
रेलवे का पक्ष: “अवैध निर्माण हटाया गया”
- रेलवे ने कहा कि 500 से अधिक अवैध दुकानें, राजनीतिक दफ्तर, कच्चा बाजार व अस्थायी मंदिर हटाए गए।
- आधिकारिक बयान में कहा गया कि मूर्ति को सम्मानपूर्वक बालु नदी में विसर्जित किया गया।
- लेकिन स्थानीयों ने दावा किया कि बुलडोजर सीधे मूर्ति तथा मंदिर पर ही चला और कोई विसर्जन प्रदर्शन तक नहीं हुआ।
भारत की प्रतिक्रिया: “गंभीर निराशा, ऐसी घटनाएं intolerable हैं”
- MEA प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि बांग्लादेश सरकार की जिम्मेदारी है कि वह धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करे।
- उन्होंने आरोप लगाया कि चरमपंथी दबाव में सरकार ने विध्वंस को ‘अवैध कब्जा’ बताकर इसे अंजाम दिया ।
- बुलडोजर चलने से पहले मूर्ति क्षतिग्रस्त हुई और इसे समय पर स्थानांतरित नहीं किया गया, जिससे यह अत्यंत चिंताजनक स्थिति बनी ।
बांग्लादेश सरकार की सफाई
सरकार ने कहा कि यह कार्रवाई सरकारी जमीन कब्जा मुक्त कराने की नियमित प्रक्रिया थी और पूर्व में अनुमति देने के बाद मंदिर नहीं हटाने की वजह से ऐसा करना पड़ा ।
देश में मौजूदा माहौल और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
- यह घटना बंगलादेश में अल्पसंख्यक समुदायों के हालिया उत्पीड़न की एक कड़ी प्रतीत होती है ।
- हाल के वर्षों में अनेक मंदिरों और पूजा मंडलों पर हमला और विध्वंस की घटनाएं दर्ज की जा चुकी हैं ।
- फरवरी 2025 में शुरू हुई ’बुलडोजर मार्च’ में भी धार्मिक संरचनाओं और Awami League कार्यालयों को निशाना बनाया गया ।
अगले कदम और क्या होगा?
- आज के बंगबंध बंद (Bangladesh Bandh) से यह स्पष्ट है कि अल्पसंख्यक समुदाय इस मुद्दे पर गहरी नाराजगी और चिंता व्यक्त कर रहा है।
- विश्वविद्यालयों और कानूनी संगठनों ने भी विरोध जताया, जिससे यह देखना होगा कि सरकार अब क्या कार्रवाई करती है।
- भारत-बांग्लादेश संबंध में यह विवाद एक तनाव का मुद्दा बन सकता है—भारत ने इसे संजीदा चिंता और निराशा बताते हुए बांग्लादेश से स्पष्टीकरण और सुरक्षा कदमों की मांग की है।
ढाका के खिलखेत दुर्गा मंदिर विध्वंस ने धार्मिक सहिष्णुता, अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और लोकतांत्रिक मूल्यों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जनता का बंगबंध प्रदर्शन और विद्यार्थी विरोध इस बात का संकेत हैं कि वह इस मामले को चुपचाप सहने को तैयार नहीं। अब बांग्लादेश सरकार और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की क्या प्रतिक्रिया होगी, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।
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