कार्यक्रम में गौ-पूजन, गौ-सेवा, और गौ-संरक्षण से संबंधित विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया गया। गौ-महाकुंभ में गौ-माता की महत्ता को दर्शाने वाली प्रदर्शनियां लगाई गईं, जिनमें गौ-उत्पादों और जैविक खेती की जानकारी दी गई। यह आयोजन न केवल गौ-संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने का माध्यम बना, बल्कि इसे सामाजिक और सांस्कृतिक उत्सव के रूप में भी देखा गया।

प्रथम गौ-महाकुंभ का आयोजन
मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने अपने संबोधन में गौ-माता को सनातन संस्कृति की आत्मा बताते हुए कहा कि गौ-संवर्धन देश की संस्कृति से जुड़ा एक पुनीत कार्य है। उन्होंने अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए बताया कि गौ-माता से उनका विशेष लगाव रहा है, जो उनके जीवन में समृद्धि और कष्टों को दूर करने का स्रोत रही है। सीएम ने कहा, “जहां गौ-माता की पूजा होती है, वहां समृद्धि और संस्कार दोनों होते हैं।”
Gau-Mahakumbh 2025: 30,000 रुपये का अनुदान
उन्होंने यह भी घोषणा की कि राजस्थान सरकार बैलों से खेती करने वाले किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए 30,000 रुपये का अनुदान प्रदान कर रही है। यह पहल न केवल जैविक खेती को बढ़ावा देगी, बल्कि गौ-वंश के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। सीएम ने गौ-माता को राजस्थान में ‘राज्य माता’ का दर्जा देने की मांग का समर्थन करते हुए कहा कि सरकार इस दिशा में विचार कर रही है और जल्द ही इस पर निर्णय लिया जाएगा।
गौ-संरक्षण और भविष्य की योजनाएं
बैलों से खेती करने पर किसानों को हमारी सरकार 30,000 रुपए का अनुदान दे रही है। pic.twitter.com/jZbXVWTLfk
— Bhajanlal Sharma (@BhajanlalBjp) September 6, 2025
कार्यक्रम में गौ-संरक्षण के लिए कई योजनाओं पर चर्चा हुई। गौ-महाकुंभ में आए संत समाज और गौसेवकों ने गौ-माता को राष्ट्रीय और राज्य माता का दर्जा देने की मांग को दोहराया। इसके अलावा, गौ-उत्पादों को बढ़ावा देने और गौशालाओं के लिए सरकारी सहायता बढ़ाने की योजनाओं पर भी विचार-विमर्श किया गया। आयोजन में गौ-वंश की हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने और इसके लिए कठोर कानून बनाने की मांग भी उठी।
