देश के सबसे स्वच्छ शहर का तमगा रखने वाले इंदौर में हालात अब चिंता बढ़ाने वाले हैं. भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी से हो रही मौतों का सिलसिला थम नहीं रहा है और इसी बीच मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने मामले को बेहद गंभीर मानते हुए सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने स्वतंत्र जांच आयोग के गठन का आदेश दिया है, जिससे पूरे मामले की परत-दर-परत जांच हो सके।
सरकार से कोर्ट ने पूछे तीखे सवाल
हाईकोर्ट में इस मामले पर करीब ढाई घंटे तक चली सुनवाई के दौरान न्यायालय ने राज्य सरकार और नगर निगम की कार्यप्रणाली पर खुलकर नाराजगी जताई। कोर्ट ने सेवानिवृत्त जस्टिस सुशील कुमार गुप्ता की अध्यक्षता में एकल सदस्यीय जांच आयोग का गठन किया है। आयोग को चार सप्ताह के भीतर अंतरिम रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।
भागीरथपुरा में हालात बद से बदतर
कोर्ट की सख्ती के बीच जमीनी हालात लगातार बिगड़ते दिख रहे हैं। बुधवार सुबह भागीरथपुरा निवासी लक्ष्मी रजक की इलाज के दौरान मौत हो गई। इसके साथ ही दूषित पानी से जान गंवाने वालों की संख्या 30 तक पहुंच गई है। इससे एक दिन पहले मंगलवार को 75 वर्षीय खूबचंद गन्नुदास की भी उल्टी-दस्त की शिकायत के बाद उपचार के दौरान मौत हो चुकी थी।
सड़क पर शव रखकर चक्काजाम
लगातार हो रही मौतों से गुस्साए स्थानीय लोगों और परिजनों ने बुधवार को सड़क पर शव रखकर चक्काजाम कर दिया। कुछ समय के लिए इलाके में तनाव का माहौल बन गया। समझाइश के बाद लोग अंत्येष्टि के लिए माने और शव श्मशान घाट ले जाया गया। परिजनों का कहना है कि कई पीड़ित पिछले 10 से 15 दिनों से उल्टी-दस्त से जूझ रहे थे, लेकिन हालात संभलने का नाम नहीं ले रहे।
कोर्ट का साफ संदेश
हाईकोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि सुरक्षित पेयजल आपूर्ति, मरीजों के इलाज और जांच से जुड़े निर्देशों का जमीनी स्तर पर पूरा पालन नहीं हुआ। यही वजह है कि कोर्ट को स्वतंत्र जांच आयोग बनाना पड़ा। आयोग जल प्रदूषण के कारणों, वास्तविक मौतों की संख्या, बीमारियों की प्रकृति, चिकित्सा व्यवस्था की पर्याप्तता, जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही और पीड़ितों को मिलने वाले मुआवजे पर विस्तृत रिपोर्ट देगा।
अब निगाहें रिपोर्ट और अगली सुनवाई पर
फिलहाल, इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में डर और गुस्से का माहौल है। लोग सवाल कर रहे हैं कि जब शहर स्वच्छता के लिए देश में अव्वल है, तो पीने का पानी इतना जहरीला कैसे हो गया। अब निगाहें जांच आयोग की अंतरिम रिपोर्ट पर टिकी हैं। मामले की अगली सुनवाई 5 मार्च 2026 को होगी।
