कहीं दीवार गिरी, कहीं जिंदगी… हिमाचल से लेकर तमिलनाडु तक बारिश बाढ़

बुधवार रात जब लोग चैन की नींद सो रहे थे, हिमाचल की पहाड़ियां जाग रही थीं। कुल्लू की तीर्थन घाटी, श्रीखंड की ऊंची चट्टानों और शिमला की शांत वादियों में बादल फटने की गूंज थी। एक पल में नदी उफान पर, दूसरी ही सांस में मकान ध्वस्त। कोई खिड़की से बाहर झांक भी नहीं पाया कि मलबा पूरे घर को लील गया।
कोटखाई में एक पेट्रोल पंप और कई गाड़ियां मलबे में दब गईं। रामपुर में चट्टान के नीचे एक 20 साल की लड़की दफन हो गई। पार्वती नदी में एक शख्स बह गया। हिमाचल की सड़कों पर अब सिर्फ मलबा और सन्नाटा है।
550 सड़कें बंद, हजारों ज़िंदगियां रुकीं
हिमाचल में दो दिनों में 4 बादल फटे। कई गांवों से संपर्क कट गया है। लोग अपने घरों की छतों पर बैठकर हेलिकॉप्टर की उम्मीद कर रहे हैं। उनके पास न पीने का पानी है, न बिजली, न मदद की आहट। चसोटी में 300 जवान मलबे से लोगों को निकालने में जुटे हैं। घरों के नीचे की मिट्टी बह गई है। सड़कें अब सड़कें नहीं रहीं, दरारों का जाल बन चुकी हैं।
उत्तर प्रदेश: जहां हर नदी एक डर बन चुकी है
20 जिलों में बाढ़ जैसे हालात हैं। लखीमपुर में शारदा नदी घरों की दीवारों से टकरा रही है। संभल में गंगा का जलस्तर इतना ऊपर आ गया है कि 20 गांवों को खाली कराने की नौबत आ चुकी है। लखनऊ के अलीगंज में 15 फीट की सड़क धंस गई। सोचिए, कोई स्कूटर या बच्चा उस समय वहां होता तो?
IMD का अलर्ट: अभी और खतरा बाकी है
आज MP, राजस्थान, तेलंगाना और महाराष्ट्र में ऑरेंज अलर्ट जारी है। 24 राज्यों में यलो अलर्ट। यानी यह कहानी अभी खत्म नहीं हुई है।

हमें मौसम से नहीं, अपनी लापरवाही से डरना चाहिए
बारिश तो हर साल होती है। लेकिन क्या हर साल बच्चे मरेंगे, घर बहेंगे, सड़कें धंसेंगी? प्राकृतिक आपदाएं रोकी नहीं जा सकतीं, लेकिन उनसे निपटने की तैयारी तो की जा सकती है।
Read More:- हॉलमार्किंगः 1 सितंबर से सिल्वर ज्वेलरी की हॉलमार्किंग लागू होगी
Watch Now :-किश्तवाड़ आपदा – 200 लोग लापता….
