उज्जैन में चैत्र नवरात्रि की महाअष्टमी पर गुरुवार को पारंपरिक नगर पूजा का आयोजन श्रद्धा और उत्साह के साथ किया गया। श्री पंचायती अखाड़ा निरंजनी द्वारा आयोजित इस विशेष पूजा की शुरुआत सुबह 24 खंबा स्थित माता महामाया और महालया माता मंदिर में विधि-विधान से हुई, जहां संतों ने माता को मदिरा का भोग अर्पित किया।
संत-महंतों की मौजूदगी में हुआ विशेष पूजन
इस धार्मिक आयोजन में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत अरविंद पुरी महाराज सहित कई संत, महामंडलेश्वर और साधु-संत शामिल हुए। महामंडलेश्वर प्रेमानंद महाराज और शैलेषानंद जी महाराज की उपस्थिति में पूजा संपन्न हुई। आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर परंपरा का निर्वहन किया।
28 किलोमीटर लंबी नगर पूजा यात्रा
पूजन के बाद नगर पूजा यात्रा प्रारंभ हुई, जो करीब 28 किलोमीटर लंबे मार्ग से होकर निकली। यात्रा के दौरान कोटवार हांडी में मदिरा लेकर चलते रहे और मार्ग में आने वाले प्रमुख देवी व भैरव मंदिरों में ध्वज, चोला और मदिरा अर्पित की गई। बैंड-बाजों और जयकारों के बीच श्रद्धालुओं का उत्साह देखने लायक रहा।
मदिरा भोग की परंपरा का विशेष महत्व
अखाड़ा परिषद के प्रबंधक डॉ. राहुल कटारिया के अनुसार, यह नगर पूजा सदियों पुरानी परंपरा का हिस्सा है। विशेष बात यह है कि कोरोना काल में भी इस परंपरा को नहीं रोका गया। महाअष्टमी पर माता को मदिरा का भोग लगाने की परंपरा धार्मिक आस्था और स्थानीय मान्यताओं से जुड़ी हुई है।
कन्या पूजन और भंडारे का आयोजन
नगर पूजा यात्रा के बाद बड़नगर रोड स्थित श्री पंचायती अखाड़ा निरंजनी में कन्या पूजन किया गया। इसके साथ ही विशाल भंडारे का आयोजन हुआ, जिसमें संत-महंतों के साथ जनप्रतिनिधि, अधिकारी और बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। यह आयोजन उज्जैन की धार्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
