कांग्रेस से जुड़ी नेता आकांक्षा नेगी के कथित बयान को लेकर उत्तराखंड में विवाद बढ़ता जा रहा है। पंजाबी समाज को कथित तौर पर ‘पाकिस्तानी’ कहे जाने के बाद उनके खिलाफ गिरफ्तारी की मांग तेज हो गई है। भाजपा नेता कुंवर जपेंद्र सिंह और पंजाबी समाज से जुड़े लोगों ने पुलिस को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। उनका कहना है कि इस तरह की टिप्पणी से पूरे पंजाबी समाज की भावनाएं आहत हुई हैं।
48 घंटे में गिरफ्तारी की मांग
भाजपा नेता कुंवर जपेंद्र सिंह ने आकांक्षा नेगी की गिरफ्तारी की मांग करते हुए कहा कि पुलिस को 48 घंटे के भीतर कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि नेगी ने कुछ बड़े नेताओं के इशारे पर इस तरह का बयान दिया है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि किसी भी समाज को अपमानित करने वाली टिप्पणी को स्वीकार नहीं किया जा सकता।
पंजाबी समाज के इतिहास का दिया हवाला
कुंवर जपेंद्र सिंह ने पंजाबी समाज के गौरवशाली इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि इस समाज ने देश और समाज के लिए लंबे समय तक संघर्ष किया है। उनका कहना है कि पंजाबियों ने विदेशी आक्रांताओं का मुकाबला किया और 1947 के विभाजन का दर्द भी झेला। ऐसे समाज के लिए अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
गिरफ्तारी नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी
पंजाबी समाज से जुड़े लोगों ने चेतावनी दी है कि अगर 48 घंटे के भीतर आकांक्षा नेगी की गिरफ्तारी नहीं होती है तो आंदोलन तेज किया जाएगा। भाजपा नेता कुंवर जपेंद्र सिंह ने कहा कि जरूरत पड़ी तो वे पंजाबी समाज के साथ आमरण अनशन पर बैठने के लिए भी मजबूर होंगे। इस चेतावनी के बाद मामले को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में हलचल बढ़ गई है।
पहाड़ी-मैदानी समाज को बांटने का आरोप
रायपुर विधायक उमेश शर्मा काऊ और समस्त पंजाबी समाज ने कथित टिप्पणियों को अस्वीकार्य बताया है। आकांक्षा नेगी पर पहाड़ी और मैदानी समाज के बीच विभाजन पैदा करने की कोशिश करने का भी आरोप लगाया गया है। विरोध कर रहे लोगों का कहना है कि उत्तराखंड की सामाजिक एकता को किसी भी बयान से नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए।
संविधान का हवाला देकर उठाई कार्रवाई की मांग
विरोध करने वालों ने भारतीय संविधान और देशभक्त पंजाबियों के सम्मान का हवाला देते हुए कहा कि किसी भी समुदाय को अपमानित करने वाली भाषा स्वीकार नहीं की जा सकती। फिलहाल सभी की नजर पुलिस की कार्रवाई पर है। 48 घंटे की समयसीमा पूरी होने के बाद पंजाबी समाज की अगली रणनीति क्या होगी, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।