हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कांग्रेस की शंखनाद रैली के बाद हुए शुद्धीकरण को लेकर विवाद लगातार चर्चा में है। अब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस मामले को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में छुआछूत जैसी कोई स्थिति नहीं है और विपक्ष इस मुद्दे को बेवजह तूल दे रहा है।
धामी ने क्या कहा?
गौलापार में खेल विश्वविद्यालय के शिलान्यास कार्यक्रम में पहुंचे मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की जनता ने हमेशा सभी को साथ लेकर चलने की परंपरा को अपनाया है। उनके मुताबिक, प्रदेश में जातिगत भेदभाव जैसी स्थिति नहीं है। धामी ने कहा कि आज सनातन की विचारधारा का प्रभाव पूरी दुनिया में दिखाई दे रहा है और ऐसे समय में कांग्रेस द्वारा छुआछूत और जातिवाद जैसे मुद्दे उठाना उचित नहीं है। उन्होंने विपक्ष को मुद्दाविहीन बताते हुए कहा कि इसी वजह से ऐसे विषयों को राजनीतिक रूप दिया जा रहा है।
भाजपा से संबंध नहीं
मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि रामलीला मैदान में शुद्धीकरण करने वाले लोगों का भाजपा से कोई सीधा संबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि ये लोग भाजपा के पदाधिकारी नहीं हैं। धामी ने सरकार के कामकाज का जिक्र करते हुए कहा कि प्रदेश में ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ के आधार पर काम किया जा रहा है।
शुद्धीकरण पर दी सफाई
रामलीला मैदान के शुद्धीकरण को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कार्यक्रम कांग्रेस या कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के विरोध में नहीं किया गया था। उनका दावा है कि खरगे की सभा के दौरान रामलीला मैदान में एक धर्म विशेष से जुड़े लोगों की ओर से धार्मिक नारे लगाए गए थे। धामी के अनुसार, रामलीला मैदान धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों से जुड़ा स्थान है, इसलिए कुछ धार्मिक संगठनों ने इसके विरोध में शुद्धीकरण कार्यक्रम किया।
कांग्रेस पर तुष्टीकरण का आरोप
मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर तुष्टीकरण की राजनीति करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कांग्रेस के पुराने नेताओं का जिक्र करते हुए कहा कि पार्टी के इतिहास में सीताराम केसरी, जगजीवन राम और डॉ. भीमराव आंबेडकर के साथ हुए व्यवहार को भी देखा जाना चाहिए। धामी ने कहा कि कांग्रेस लंबे समय से तुष्टीकरण की राजनीति करती रही है और अब वोटों के लिए इसी तरह का माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है।
मौलाना मामले पर भी बोले
रुद्रपुर में बारावफात के जुलूस के दौरान कथित भड़काऊ भाषण के मामले पर भी मुख्यमंत्री ने सख्त रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि मामले में कानून के मुताबिक कार्रवाई होगी और किसी भी व्यक्ति के धमकी भरे बयान से राज्य की व्यवस्था नहीं चलेगी। धामी ने कहा कि उत्तराखंड में कानून का राज है और भड़काऊ या धमकी देने वाले बयानों को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।