उत्तर प्रदेश में मानसून एक बार फिर सक्रिय हो गया है। शुक्रवार तड़के से लखनऊ, बाराबंकी, सीतापुर, बरेली और संभल समेत 15 शहरों में रुक-रुककर बारिश हो रही है। मौसम विभाग ने प्रदेश के सभी 75 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया है। वहीं, 15 जिलों में भारी बारिश की संभावना जताई गई है।
बारिश के कारण कई इलाकों में हालात बिगड़ गए हैं। आगरा से करीब 50 किलोमीटर दूर पिनाहट गांव में बरसाती नदी उफान पर है। यहां एक व्यक्ति ने प्रसव के बाद अपनी पत्नी और नवजात बच्चे को चारपाई के सहारे नदी पार कराई। ग्रामीणों के मुताबिक, नदी पर कोई पुल नहीं है। सामान्य दिनों में नदी सूखी रहती है, लेकिन बारिश के दौरान इसका जलस्तर बढ़ जाता है और लोगों को जान जोखिम में डालकर इसे पार करना पड़ता है।

10 नदियां चेतावनी बिंदु के पार
पहाड़ों पर लगातार हो रही बारिश का असर मैदानी इलाकों में भी दिखाई दे रहा है। यूपी में गंगा, यमुना और शारदा समेत करीब 10 नदियां चेतावनी बिंदु को पार कर चुकी हैं। प्रदेश के 16 जिलों के 80 से ज्यादा गांव बाढ़ की चपेट में हैं। फर्रुखाबाद में सबसे ज्यादा 49 गांवों पर बाढ़ का असर पड़ा है।
उन्नाव में गंगा का पानी रिहायशी इलाकों में घुस गया है। कई परिवार घर छोड़कर छतों पर रहने को मजबूर हैं। गलियों में पानी भरने के कारण नावों का सहारा लिया जा रहा है।
कानपुर में नाव से स्कूल जा रहे बच्चे

कानपुर के पांच से ज्यादा गांवों में बाढ़ का पानी पहुंच गया है। यहां बच्चे नाव के जरिए स्कूल जाने को मजबूर हैं। जलभराव और बाढ़ के कारण ग्रामीणों की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हुई है।
वाराणसी में भी गंगा का जलस्तर बढ़ने से घाटों पर पानी सीढ़ियों तक पहुंच गया है। 100 से ज्यादा छोटे मंदिर जलमग्न हो गए हैं। हरिश्चंद्र घाट का शवदाह स्थल भी पानी में डूब गया है।
कई शहरों में जलभराव

इससे पहले गुरुवार को प्रयागराज, गोरखपुर और आजमगढ़ समेत 15 जिलों में बारिश हुई थी। जौनपुर में भारी बारिश के बाद सड़कें तालाब में तब्दील हो गईं। वहीं, गोरखपुर की सड़कों पर करीब एक फीट तक पानी भर गया।
लगातार बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर से प्रदेश के कई जिलों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। प्रशासन की ओर से प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्य जारी हैं।