यूपी में बच्चों में नाटेपन की दर घटी, 31.5% पर पहुंची: टेक होम राशन योजना से पोषण पर जोर- योगी सरकार का कमाल

यूपी में बच्चों में नाटेपन की दर घटी, 31.5% पर पहुंची: टेक होम राशन योजना से पोषण पर जोर- योगी सरकार का कमाल

उत्तर प्रदेश सरकार ने बच्चों में नाटेपन की दर और कुपोषण में सुधार का दावा किया है, THR योजना के तहत विभिन्न पोषण उत्पाद शामिल किए गए हैं।

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योगी सरकार का कमालः उत्तर प्रदेश में कुपोषण के खिलाफ चलाये जा रहे अभियान के तहत टेक होम राशन (टीएचआर) योजना के जरिए बच्चों, गर्भवती और धात्री महिलाओं की अलग-अलग पोषण जरूरतों के अनुसार उत्पाद तैयार कर उपलब्ध कराए जा रहे हैं. योजना के तहत शिशु अमृत, शिशु आहार, बाल पुष्टिकर, संपूर्ण मातृ आहार, आरोग्य पोषण, बाल संजीवनी और सक्षम पोषण जैसे सात उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं. इनमें ऊर्जा, प्रोटीन, आयरन समेत जरूरी पोषक तत्व शामिल किए गए हैं.

बच्चों में नाटेपन की दर में आया सुधार

उत्तर प्रदेश सरकार ने कुपोषण के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत बच्चों के पोषण स्तर में सुधार का दावा किया है। सरकार के अनुसार, वर्ष 2015-16 में बच्चों में नाटेपन की दर 46.3 प्रतिशत थी, जो 2019-21 में घटकर 39.7 प्रतिशत रह गई। अब यह आंकड़ा 31.5 प्रतिशत तक पहुंच गया है। इसके साथ ही बच्चों में अल्पवजन और दुबलेपन जैसी समस्याओं में भी सुधार दर्ज किया गया है।

टेक होम राशन में सात तरह के पोषण उत्पाद

सरकार के मुताबिक, टेक होम राशन (THR) योजना के तहत बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं की अलग-अलग पोषण जरूरतों को ध्यान में रखकर सामग्री तैयार की जा रही है। योजना में शिशु अमृत, शिशु आहार, बाल पुष्टिकर, संपूर्ण मातृ आहार, आरोग्य पोषण, बाल संजीवनी और सक्षम पोषण जैसे सात उत्पाद शामिल हैं। इनमें ऊर्जा, प्रोटीन, आयरन समेत जरूरी पोषक तत्व उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है।

आंगनबाड़ी केंद्रों से पोषण की निगरानी

टेक होम राशन योजना को आंगनबाड़ी सेवाओं से जोड़ा गया है। आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां लाभार्थियों को पोषण सामग्री उपलब्ध कराने के साथ बच्चों का वजन और विकास भी मॉनिटर करती हैं। इसके अलावा गर्भवती और धात्री महिलाओं को पोषण संबंधी सलाह दी जाती है। सरकार का उद्देश्य पोषण योजनाओं की पहुंच को जमीनी स्तर तक मजबूत करना है।

महिला स्वयं सहायता समूहों को रोजगार से जोड़ा

टेक होम राशन योजना की एक खास बात इसे महिला सशक्तीकरण से जोड़ना भी है। पोषण सामग्री के उत्पादन और आपूर्ति की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़े महिला स्वयं सहायता समूहों को दी गई है। वर्तमान में 4 हजार से अधिक महिलाएं इन उत्पादन इकाइयों से जुड़कर रोजगार प्राप्त कर रही हैं। वहीं, पोषाहार की गुणवत्ता और स्वच्छता बनाए रखने के लिए अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं। बच्चों को भोजन परोसने से पहले कम से कम दो वयस्कों द्वारा उसकी गुणवत्ता जांचने के निर्देश भी दिए गए हैं।