जयपुर से करीब तीन घंटे की दूरी पर स्थित राजस्थान के बूंदी जिले के एक कस्बे में लगे CCTV कैमरे ने महाराष्ट्र के एक बड़े साइबर फ्रॉड की जांच में अहम सुराग दिया। पिंपरी-चिंचवड़ साइबर क्राइम पुलिस ने ₹2.14 करोड़ के कथित ‘डिजिटल अरेस्ट’ फ्रॉड मामले में 32 वर्षीय कंस्ट्रक्शन मटीरियल सप्लायर राजेंद्र गणराज नागर को गिरफ्तार किया है।
70 साल से ज्यादा उम्र के दंपती से ठगी
पुलिस के मुताबिक, 74 वर्षीय रिटायर्ड पावर इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी मैनेजर और उनकी रिटायर्ड स्कूल टीचर पत्नी डिजिटल अरेस्ट स्कैम का शिकार हुए थे। आरोपियों ने महिला का नाम PFI से जुड़े एक मामले में होने का डर दिखाया और खुद को पुलिस अधिकारी बताकर गिरफ्तारी की धमकी दी।
बचत की पूरी जानकारी जुटाई
ठगों ने दंपती को कार्रवाई से बचने का झांसा देकर उनकी LIC पॉलिसी, फिक्स्ड डिपॉजिट, बैंक सेविंग्स और अन्य निवेश की जानकारी हासिल की। इसके बाद उन्हें कथित तौर पर ‘सरकारी खातों’ में पैसे ट्रांसफर करने को कहा गया। ठगों ने दावा किया कि जांच पूरी होने के बाद RBI के नियमों के तहत रकम वापस कर दी जाएगी।
आठ बार में ट्रांसफर हुए ₹2.14 करोड़
गिरफ्तारी के डर और दबाव में दंपती ने ठगों की बात मान ली और आठ अलग-अलग ट्रांजैक्शन में कुल ₹2.14 करोड़ ट्रांसफर कर दिए। बाद में जब उन्हें ठगी का एहसास हुआ तो उन्होंने पुलिस से शिकायत की। इसके बाद साइबर पुलिस ने रकम के लेनदेन की कड़ियां जोड़नी शुरू कीं।
मनी ट्रेल पहुंची बूंदी तक
जांच में पुलिस को पता चला कि फ्रॉड की रकम कई बैंक खातों के जरिए आगे भेजी गई। एक अकाउंट में करीब ₹49 लाख पहुंचे थे, जो ‘सुल्तान कंस्ट्रक्शन मटीरियल सप्लायर’ के नाम पर था। इसमें से करीब ₹38 लाख दूसरे बैंक में इसी नाम वाले एक अन्य खाते में ट्रांसफर किए गए। इसके बाद रकम नकद निकाली गई।
CCTV में कैश निकालता दिखा संदिग्ध
पुलिस ने संबंधित बैंक के CCTV फुटेज खंगाले तो एक व्यक्ति की पहचान हुई, जो कथित तौर पर खाते को ऑपरेट कर रहा था और कैश निकाल रहा था। जांच के दौरान उसकी पहचान राजेंद्र गणराज नागर के रूप में हुई। कॉल डेटा के आधार पर पुलिस को उसकी लोकेशन बूंदी जिले के लखेरी इलाके में मिली।
8 अगस्त को हुई गिरफ्तारी
बूंदी की स्थानीय पुलिस की मदद से पिंपरी-चिंचवड़ साइबर पुलिस ने 8 अगस्त को नागर को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के अनुसार, आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में है। जांच में यह भी सामने आया कि नागर कथित तौर पर ‘राजा’ नाम के एक अन्य संदिग्ध के संपर्क में था।
अब ‘राजा’ की तलाश
पुलिस को शक है कि नागर के जरिए निकाली गई रकम आगे दूसरे लोगों तक पहुंचाई गई और फिर उसे क्रिप्टोकरेंसी या हवाला नेटवर्क के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराधियों तक भेजा गया। अब जांच एजेंसियां ‘राजा’ की पहचान और भूमिका की पड़ताल कर रही हैं। पुलिस का लक्ष्य पूरे मनी ट्रेल और साइबर फ्रॉड नेटवर्क का पता लगाना है।