रायपुर में आयोजित एक साहित्यिक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने लेखक करुणा सागर पांडा के हिंदी उपन्यास ‘कोहरा’ का विमोचन किया। कार्यक्रम में साहित्य, संस्कृति और सार्वजनिक जीवन से जुड़े कई लोग मौजूद रहे। इस दौरान हिंदी साहित्य की बदलती भूमिका और पुस्तकों को अधिक से अधिक पाठकों तक पहुंचाने के तरीकों पर भी चर्चा हुई।
डिजिटल दौर में साहित्य पर चर्चा
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि डिजिटल माध्यमों के बढ़ते प्रभाव के बावजूद साहित्यिक आयोजनों की अपनी अहम भूमिका है। ऐसे कार्यक्रमों के जरिए लेखक और पाठक सीधे संवाद कर सकते हैं। साहित्यकारों और साहित्य प्रेमियों ने भी कार्यक्रम में हिस्सा लिया और समकालीन हिंदी साहित्य से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विचार साझा किए।
नक्सलवाद और ‘लव जिहाद’ पर विमर्श
लेखक करुणा सागर पांडा के मुताबिक उपन्यास ‘कोहरा’ समकालीन भारतीय समाज से जुड़े कुछ ज्वलंत और विवादित विषयों को कथा के माध्यम से सामने रखने का प्रयास करता है। उपन्यास में नक्सलवाद और ‘लव जिहाद’ जैसे मुद्दों को सामाजिक, सांस्कृतिक और वैचारिक संदर्भों में देखने की कोशिश की गई है। पुस्तक की विषयवस्तु को लेकर कार्यक्रम में भी चर्चा हुई।
भारतीय समाज और संस्कृति पर सवाल
लेखक ने उपन्यास में भारतीय समाज, संस्कृति और जीवन-मूल्यों से जुड़े सवालों को केंद्र में रखा है। रचना के जरिए सामाजिक और वैचारिक मतभेदों पर पाठकों को विचार करने का अवसर देने का प्रयास किया गया है। कार्यक्रम में साहित्य की भूमिका और बदलते सामाजिक परिवेश में ऐसी रचनाओं की प्रासंगिकता पर भी बातचीत हुई।
लेखक ने पाठकों से किया संवाद
विमोचन के बाद लेखक करुणा सागर पांडा ने अतिथियों, साहित्यकारों और साहित्य प्रेमियों के साथ ‘कोहरा’ को लेकर संवाद किया। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने पुस्तक की विषयवस्तु को लेकर लेखक से सवाल किए और अपने विचार भी साझा किए। इस दौरान साहित्य और समाज के बीच संवाद को मजबूत बनाने की जरूरत पर भी जोर दिया गया।