नेपाल में आई भीषण त्रासदी के बाद हजारों परिवारों के सामने मुश्किलें खड़ी हैं। ऐसे समय में छतरपुर के बागेश्वर धाम की ओर से नेपाल के पीड़ितों के लिए राहत सामग्री भेजी गई है। बागेश्वर धाम जन सेवा समिति के सहयोग से चार ट्रक राहत सामग्री नेपाल रवाना की गई।
राहत सामग्री में रोजमर्रा की जरूरतें शामिल
राहत सामग्री में चावल, दाल, मसाले, नमक, सोयाबीन तेल, पानी, बिस्किट और नमकीन के साथ तिरपाल भी भेजे गए हैं। इसके अलावा थाली, गिलास और कटोरी जैसे जरूरी बर्तन भी शामिल हैं। बागेश्वर धाम के प्रतिनिधि मनोज त्रिवेदी ने नेपाल पहुंचकर राहत सामग्री नेपाल सरकार के गृह मंत्रालय को सौंपी।
जानकारी मिलते ही सेवा कार्य के निर्देश
बताया गया कि त्रासदी की जानकारी मिलने के समय पंडित धीरेंद्र शास्त्री जापान में थे। जानकारी मिलते ही उन्होंने नेपाल में रह रहे नेपाली नागरिकों और शिष्य मंडल से संपर्क किया। उन्होंने जरूरतमंद परिवारों तक जल्द से जल्द राहत पहुंचाने के निर्देश दिए, जिसके बाद बागेश्वर धाम में सामग्री जुटाकर चार ट्रकों से नेपाल भेजी गई।
भारत-नेपाल के रिश्ते को बताया आत्मीय
पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने भारत और नेपाल के रिश्ते को भावनाओं और आत्मीयता से जुड़ा बताया। उनका कहना है कि दोनों देशों के संबंध केवल सीमाओं तक सीमित नहीं हैं। संकट के समय पड़ोसी देश के साथ खड़ा होना मानवता और आपसी रिश्तों की सच्ची मिसाल है।
Gen Z के लिए शुरू हुआ ध्यान शक्ति शिविर
बागेश्वर धाम में Gen Z को सकारात्मक सोच और आत्मचिंतन की दिशा देने के उद्देश्य से तीन दिवसीय ‘आत्मशुद्धि ध्यान शक्ति शिविर’ शुरू हुआ है। इसमें देशभर से करीब 750 सदस्य शामिल हुए हैं। योग, ध्यान, साधना और आत्मचिंतन के जरिए युवाओं को मानसिक रूप से मजबूत बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
योग और साधना से हुई शुरुआत
शिविर के पहले दिन ब्रह्म मुहूर्त में योग साधना हुई। इसके बाद बागेश्वर सरकार ने युवाओं को शिविर के नियमों और उद्देश्य की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह केवल तीन दिन का कार्यक्रम नहीं, बल्कि खुद को समझने और जीवन को नए नजरिए से देखने का अवसर है।
AI के दौर में आत्मचिंतन पर जोर
बागेश्वर सरकार ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI के बढ़ते प्रभाव का जिक्र करते हुए कहा कि तकनीक आने वाले समय में काम करने के तरीकों को बदल सकती है। उन्होंने युवाओं से तकनीक को चुनौती के साथ-साथ अवसर के रूप में देखने और अपने समय का इस्तेमाल रचनात्मकता, आत्मचिंतन और समाज के लिए बेहतर कार्यों में करने की बात कही।
युवाओं को नेतृत्व के लिए तैयार करने की पहल
उन्होंने कहा कि युवा देश का भविष्य हैं। इसलिए ज्ञान के साथ विवेक, सकारात्मक सोच, आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता का विकास भी जरूरी है। इसी उद्देश्य से यह शिविर युवाओं को तकनीक और मानसिक शांति के बीच संतुलन बनाने की दिशा में एक पहल के रूप में देखा जा रहा है।