
जलती होलिका के बीच दौड़ा पंडा
संजू पंडा बीच में अग्नि देवता को प्रणाम करता है, फिर कुछ सेकेंड में ही जलती होलिका को पार कर जाता है। और उफ तक नहीं करता, शरीर बिल्कुल नहीं झुलसता। यह दृश्य जिसने भी यह नजारा देखा, वो हैरान रह गया। देश-विदेश के 50 हजार से ज्यादा लोग बांके-बिहारी की जय का उद्घोष करने लगे।
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जलती होलिका से निकला पंडा[/caption]
5200 साल पुरानी परंपरा
करीब 5200 साल पुरानी यह परंपरा फालैन गांव में होलिका दहन की रात मनाई जाती है। मान्यता है कि हिरण्यकश्यप की बहन होलिका ने प्रह्लाद को जलाने का प्रयास किया था, लेकिन वह ऐसा नहीं कर पाई थी। यह दूसरी बार है जब संजू पंडा धधकती आग के बीच से निकला है। इससे पहले, संजू के बड़े भाई मोनू पंडा इस परंपरा को निभाते रहे हैं।
Mathura Holika Dahan Panda: 45 दिन की तपस्या
संजू पांडा पिछले 45 दिनों से प्रह्लाद मंदिर में तपस्या कर रहे थे। जमीन पर सोकर और केवल फलाहार लेकर ब्रह्मचर्य का पालन किया। परंपरा के मुताबिक, होलिका दहन से पहले उन्होंने मंदिर की ज्योति पर हाथ रखकर देवी संकट का इंतजार किया। जैसे ही उन्हें ज्योति में शीतलता महसूस हुई, उन्होंने आग में प्रवेश का इशारा कर दिया।
data-instgrm-version="14">बहन ने होलिका को दिया अर्घ्य
संजू पंडा का कहना है कि 45 दिनों तक ठाकुर जी की सेवा की। बताशा और घी से हवन चलता है। हमारी बहन पहले होलिका पर दूध से धार देती है। इसके बाद ही हम आग से निकलते हैं। इस दौरान प्रह्लाद जी साक्षात हमारे साथ होते हैं।
विदेशी पर्यटक दंग
इस दृश्य को देखने जर्मनी, इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया जैसे कई देशों से विदेशी पर्यटक भी पहुंचे और दंग रह गए। विज्ञान के जानकारों के मुताबिक, यह आज भी एक अनसुलझी पहेली है, लेकिन ग्रामीण इसे भगवान नरसिंह का वरदान मानते हैं जिसे प्रह्लाद के वंशज निभाते आ रहे हैं।