उत्तराखंड में बिना मान्यता संचालित हो रहे मदरसों पर सरकार की सख्ती का असर दिखाई दे रहा है। राज्य में अब तक 107 मदरसे बंद हो चुके हैं। इनमें सबसे ज्यादा 102 मदरसे हरिद्वार जिले के हैं।
हरिद्वार में 102 मदरसों पर लगा ताला
हरिद्वार जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी की रिपोर्ट के मुताबिक जिले में 102 मदरसे बंद हो चुके हैं। वहीं 76 मदरसों ने मान्यता के लिए शिक्षा विभाग में आवेदन किया है, जिनके मामले फिलहाल विचाराधीन हैं।
45 मदरसे पंजीकृत, 46 की जांच बाकी
रिपोर्ट के अनुसार हरिद्वार में 45 मदरसे शिक्षा विभाग में पंजीकृत हैं। इसके अलावा 46 मदरसों का अभी निरीक्षण किया जाना बाकी है। प्रशासन की ओर से इन संस्थानों की स्थिति की जांच की जा रही है।
ऊधमसिंह नगर में भी कार्रवाई
राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अनुसार ऊधमसिंह नगर में 119 मदरसे हैं। इनमें से पांच बंद हो चुके हैं, जबकि 60 मदरसों ने अभी तक शिक्षा विभाग से मान्यता के लिए आवेदन नहीं किया है।
नैनीताल के 12 मदरसों ने किया आवेदन
नैनीताल जिले में कुल 18 मदरसे बताए गए हैं। इनमें से 12 ने मान्यता के लिए आवेदन किया है। वहीं पिथौरागढ़ में एक और चंपावत में दो मदरसे हैं, लेकिन इन जिलों की विस्तृत रिपोर्ट अभी प्राधिकरण को नहीं मिली है।
पुराने रिकॉर्ड में भी बड़ी संख्या
मदरसा बोर्ड खत्म होने से पहले देहरादून में 41, नैनीताल में 18, हरिद्वार में 270 और ऊधमसिंह नगर में 119 मदरसे विभिन्न स्तरों की मान्यता के साथ पंजीकृत थे। इसके अलावा बिना पंजीकरण चल रहे मदरसों की पूरी संख्या का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है।
जांच अभियान आगे भी रहेगा जारी
राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. सुरजीत सिंह गांधी के मुताबिक मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों के तहत मदरसों की जांच का अभियान जारी है। प्रशासन का कहना है कि अभियान के दौरान बिना मान्यता संचालित कई मदरसे खुद भी बंद हो चुके हैं और आगे भी जांच जारी रहेगी।