भोपाल/नई दिल्ली। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नई दिल्ली में वर्ल्ड लीडर्स फोरम:2026 में भाग लिया। इसमें उन्होंने मध्यप्रदेश के विकास और निवेश संभावनाओं पर संवाद किया। इस फोरम में प्रदेश के विकास, नई अर्थव्यवस्था, ऊर्जा व्यापार सहित कई मुद्दों पर बातचीत हुई। कार्यक्रम में सीएम डॉ. यादव ने प्रदेश के विकास का रोडमैप सबके सामने रखा।
मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सभी राज्यों ने आगे बढ़ने का लक्ष्य रखा है। प्रदेश की पहचान एक कृषि आधारित राज्य के रूप में होती है। हमारी सरकार ने राज्य के नैसर्गिक क्षमताओं को पहचाना और ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट भोपाल में कराई। उससे पहले संभाग और जिला स्तर पर रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव आयोजित की गई। मध्यप्रदेश सरकार के इस मॉडल को काफी सराहना मिली, जिसे देश के दूसरे राज्यों ने भी अपनाया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने उद्योग एवं निवेश के अनुकूल वातावरण तैयार करने के लिए कई गैर जरूरी कानून को खत्म किया और उद्योग, व्यापार, निवेश को बढ़ाने के लिए पारदर्शी नीतियां प्लागू की। मध्य प्रदेश के पास औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने के लिए पर्याप्त लैंड बैंक, बिजली और पानी की आपूर्ति है। प्रदेश में उद्योग और व्यापार के अनुकूल नीतियां लागू होने से बीते 1 साल में 10 लाख करोड रुपए का निवेश धरातल पर आया है। प्रदेश में अनेक स्थानों पर औद्योगिक इकाइयां शुरू भी हो चुकी हैं।
2700 से ज्यादा बेवजह से सर्कुलर किए खत्म
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश में पर्याप्त लैंड बैंक है। राज्य सरकार ने ऐसी नीतियां बनाई जिससे निवेशकों को निवेश का अवसर मिले। जन विश्वास अधिनियम लागू किया गया और 900 से अधिक गैर जरूरी कानूनों को भी खत्म किया। सरकार ने 2700 से अधिक बेवजह के सर्कुलर खत्म किए। इन सभी प्रयासों से मध्य प्रदेश में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस का माहौल तैयार हुआ। हमारी सरकार निवेशकों को मात्र 29 दिन में उपलब्ध कराती है। दावोस समिट में उसी दिन निवेशकों ने भूमि आवंटन कर लिया, जिनमें से कई भूमि-पूजन भी हो चुके हैं। राज्य सरकार ने अपनी प्रतिबद्धता के बल पर सभी निवेशकों को गत माह तक की निवेश प्रोत्साहन सब्सिडी डीबीटी के माध्यम से भेजी है। उन्होंने कहा कि हमारे इन्हीं प्रयासों से निवेश को और सरकार के बीच विश्वास का रिश्ता मजबूत होता है। राज्य सरकार ने प्रदेश में अलग-अलग क्षेत्र के आधार पर औद्योगिक क्लस्टर विकसित किए हैं। मालवा बेल्ट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने जन्मदिवस पर पिछले साल देश के सबसे बड़े और पहले पीएम मित्र पार्क का भूमि-पूजन किया। उन्होंने कहा कि यहां 24 घंटे में ही सभी औद्योगिक भूखंड आवंटित हो गए। पीएम मित्र पार्क में औद्योगिक इकाइयां शुरू होने का कार्य तेजी से चल रहा है।
प्रदेश के सभी जिलों के समग्र विकास की योजना
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश, राजस्थान के बाद क्षेत्रफल की दृष्टि से देश का दूसरा सबसे बड़ा राज्य है। राज्य के कई क्षेत्रों में अपनी-अपनी अनुकूलता है। मालवा क्षेत्र में कॉटन प्रोडक्शन के हिसाब से गारमेंट सेक्टर की कंपनियां, सीधी और सिंगरौली जैसे माइनिंग वाले क्षेत्रों में कोल थर्मल पावर प्लांट, शहडोल में सरिया निर्माण के लिए टीएमटी का डेढ़ साल में ही प्लांट तैयार हो चुका है। एनर्जी सेक्टर के लिए नर्मदापुरम के बाबई- मोहासा में औद्योगिक पार्क विकसित किया जा रहा है। जहां लगातार बढ़ रही निवेशकों की संख्या सरकार पर भरोसे का प्रतीक है। इसी प्रकार ग्वालियर क्षेत्र में टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जॉन विकसित करने के लिए प्रयास जारी हैं। इसके लिए पहली बार देश में किसी राज्य ने केंद्र सरकार के साथ एमओयू साइन किया है। झांसी से लगे क्षेत्र के आसपास डिफेंस कॉरिडोर भी विकसित किया जा रहा है। पिछले दिनों 4000 करोड़ रुपए निवेश के साथ अदानी इंडस्ट्रीज की एक ईकाई का भूमि पूजन भी किया है। राज्य सरकार ने एजुकेशन, हेल्थ, फूड, एनर्जी जैसे सेक्टर के लिए 24 नीतियां लागू की है। निवेशक आऐं उन्हें सभी सुविधाएं दी जाएगी। उद्योग अपने पैरों पर खड़े हो यही हमारा प्रयास है।
धरातल पर उतर रहे निवेश प्रस्ताव
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ग्वालियर के टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जॉन के लिए दिल्ली में 5500 करोड़ से अधिक का निवेश प्राप्त हुआ। मुंबई में भी निवेश का आंकड़ा इसी के आसपास रहा है। दोनों स्थानों पर निवेश सम्मेलनों के बाद टीएमजेड के भूमिपूजन से पहले ही अब तक लगभग 10 हजार करोड़ रुपए के आसपास निवेश प्रस्ताव आ चुके हैं। राज्य सरकार अपने डेवलप्ड प्लॉट निवेशकों को सस्ती दरों पर उपलब्ध करा रही है। प्रदेश में ग्रीन एनर्जी के क्षेत्र में क्या कार्य हुए हैं और कितना निवेश प्राप्त हुआ है?
भविष्य में 50 फीसदी होगा ग्रीन एनर्जी का हिस्सा
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में अभी 31 गीगावाट का एनर्जी सेक्टर है, जिसमें ग्रीन एनर्जी का हिस्सा 30 प्रतिशत है। राज्य सरकार ने इसे बढ़कर 50 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य रखा है। इसीलिए सरकार एनर्जी सेक्टर को पंप स्टोरेज, सोलर एनर्जी और विंड एनर्जी को बढ़ावा दे रही है। माइनिंग सेक्टर में भी मध्य प्रदेश अग्रणी राज्य है। देश की सभी प्रमुख सीमेंट कंपनियों के प्लांट मध्य प्रदेश में स्थित है उन्होंने कहा कि प्रदेश इकलौता राज्य है, जहां हीरा भी मिलता है। हमारी सरकार बनने के बाद राज्य में पांच नए एयरपोर्ट बनकर तैयार हुए हैं। प्रदेश में 5 और नए एयरपोर्ट विकसित करने के लिए एमओयू साइन हो चुका है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश के 55 में से 37 जिलों से निर्यात हो रहा है। आज राज्य में 88 हजार करोड़ रुपए का निर्यात हो रहा है। मध्यप्रदेश देश में तीसरा सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक राज्य भी है।
सभी मिलकर करें काम
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार का प्रयास है कि सभी बड़े निवेशक अपने राज्यों में तो काम करें ही साथ ही मध्य प्रदेश की निवेश अनुकूल नीतियों का भी प्रदेश में आकर लाभ उठाएं। राजस्थान के साथ पार्वती-कालीसिंध-चंबल परियोजना और उत्तर प्रदेश के साथ केन-बेतवा लिंक नदी जोड़ो परियोजना आपसी सामंजस्य का उदाहरण है। सभी राज्य इसी प्रकार मिल-जुलकर काम करें तो देश की प्रकृति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश के हर क्षेत्र को उद्योग और विकास से लाभान्वित करना बड़ी चुनौती थी, जिसमें हमारी सरकार सफल रही है। वर्ष 2047 में देश की आजादी के 100 वर्ष पूर्ण होंगे। मध्यप्रदेश की प्रति व्यक्ति आय पिछले 2 साल में बढ़कर 1 लाख 67 हजार से अधिक हो गई है। वर्ष 2047 तक प्रति व्यक्ति आय 22 लाख 50 हजार तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। आजादी के बाद वर्ष 2002-03 तक प्रदेश में केवल 5 मेडिकल कॉलेज थे,0 अब इनकी संख्या 39 है। हमारे कार्यकाल में ही 15 नए मेडिकल कॉलेज शुरू किए गए हैं। प्रदेश में 2 साल के अंदर तीन शासकीय विश्वविद्यालय प्रारंभ किए गए। प्रदेश में 52 निजी विश्वविद्यालय सहित कुल 73 विश्वविद्यालय संचालित है।